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Interesting News: अंतरिक्ष की चकाचौंध और सितारों के बीच सैर करने का सपना देखने वालों के लिए एक ऐसी खबर सामने आई है, जो आपको सोचने पर मजबूर कर देगी। हालिया वैज्ञानिक शोध में यह डरावना सच सामने आया है कि माइक्रो-ग्रेविटी (बेहद कम गुरुत्वाकर्षण) में रहने के दौरान इंसानी दिमाग न केवल अपनी जगह छोड़ देता है, बल्कि वह ऊपर और पीछे की ओर खिसकने लगता है।
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वैज्ञानिक रेचल सीडलर और उनकी टीम द्वारा किए गए इस शोध ने अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में खलबली मचा दी है। शोधकर्ताओं ने 26 जांबाज अंतरिक्ष यात्रियों के मिशन पर जाने से पहले और वहां से लौटने के बाद एमआरआई (MRI) स्कैन किए। नतीजों ने सबको हैरान कर दिया—दिमाग का लगभग हर हिस्सा अपनी मूल स्थिति से विस्थापित हो चुका था।
सिर्फ ऊपर नहीं, पीछे की ओर भी खिसका भेजा
अध्ययन में पाया गया कि अंतरिक्ष की शून्यता में दिमाग किसी एक तरफ नहीं, बल्कि पूरे विस्थापन का शिकार होता है। वैज्ञानिकों ने दिमाग को 130 हिस्सों में बांटकर बारीकी से परखा और पाया कि लगभग हर हिस्से में खिंचाव था। एमआईटी (MIT) के वैज्ञानिकों ने इस स्थिति को समझने के लिए धरती पर एक प्रयोग भी किया, जिसमें लोगों को 60 दिनों तक सिर झुकाकर लेटाया गया था, ताकि शरीर के तरल पदार्थों के बहाव को समझा जा सके। लेकिन अंतरिक्ष यात्रियों की स्थिति उन लोगों से कहीं ज्यादा गंभीर पाई गई।
2.52 मिलीमीटर का वो फासला और संतुलन का संकट
एक साल तक अंतरिक्ष की सैर करने वाले यात्रियों के दिमाग में 2.52 मिलीमीटर तक का विस्थापन दर्ज किया गया। सुनने में यह आंकड़ा छोटा लग सकता है, लेकिन मानव मस्तिष्क जैसे संवेदनशील अंग के लिए यह बहुत बड़ा बदलाव है। यही कारण है कि जब यात्री धरती पर लौटते हैं, तो उनके कदम डगमगाते हैं। हमारे कान के भीतर जो बैलेंस सिस्टम होता है, वह गुरुत्वाकर्षण के भरोसे चलता है। अंतरिक्ष में दिमाग के खिसकने से यह तालमेल बिगड़ जाता है।
क्या कभी सामान्य हो पाएगा दिमाग?
सबसे ज्यादा चिंताजनक पहलू यह है कि यह बदलाव अस्थायी नहीं लग रहे। रिसर्च में देखा गया कि धरती की आबोहवा में वापस आने के छह महीने बाद भी कई यात्रियों का दिमाग अपनी पुरानी स्थिति में नहीं लौट पाया था। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इंसान जितना लंबा समय अंतरिक्ष में बिताएगा, उसके दिमाग पर पड़ने वाले ये प्रभाव उतने ही गहरे और खतरनाक होंगे। यह शोध भविष्य के मंगल मिशनों और लंबी अंतरिक्ष यात्राओं पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाता है।

