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World News: अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में एक स्वर्णिम अध्याय का समापन हो गया है। भारतीय मूल की दिग्गज अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA से सेवानिवृत्ति ले ली है। नासा ने आधिकारिक रूप से पुष्टि की है कि 27 वर्षों की सेवा के बाद सुनीता विलियम्स की रिटायरमेंट 27 दिसंबर से प्रभावी हो चुकी है।
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खास बात यह है कि यह घोषणा ऐसे समय में सामने आई है, जब सुनीता विलियम्स भारत दौरे पर हैं और अपने पैतृक देश से भावनात्मक जुड़ाव साझा कर रही हैं।
608 दिन अंतरिक्ष में, 9 बार स्पेस वॉक
1998 में नासा के लिए चयनित हुईं सुनीता विलियम्स ने अपने करियर में तीन बड़े अंतरिक्ष मिशनों में हिस्सा लिया। उन्होंने कुल 608 दिन अंतरिक्ष में बिताए, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।
उनके नाम 9 बार अंतरिक्ष में चहलकदमी यानी स्पेस वॉक का रिकॉर्ड दर्ज है, जिसकी कुल अवधि 62 घंटे 6 मिनट रही। यह किसी भी महिला अंतरिक्ष यात्री द्वारा किया गया सबसे अधिक स्पेस वॉक है और नासा के इतिहास में चौथा सबसे बड़ा रिकॉर्ड माना जाता है।
इसके अलावा, सुनीता विलियम्स अंतरिक्ष में मैराथन दौड़ पूरी करने वाली दुनिया की पहली अंतरिक्ष यात्री भी रही हैं।
भारतीय जड़ें, वैश्विक पहचान
अमेरिकी नौसेना की पूर्व कैप्टन रहीं सुनीता विलियम्स का जन्म 19 सितंबर 1965 को ओहियो में हुआ था। उनके पिता दीपक पंड्या गुजरात के मेहसाणा जिले से थे, जबकि उनकी मां उर्सुलिन बोनी पंड्या स्लोवेनियाई मूल की थीं।
सुनीता हमेशा खुलकर कहती रही हैं कि भारत उनके दिल के बेहद करीब है और अंतरिक्ष से पृथ्वी को देखते समय वह सबसे पहले भारत को खोजने की कोशिश करती थीं।
स्टारलाइनर मिशन बना सबसे चुनौतीपूर्ण अध्याय
सुनीता विलियम्स का अंतिम मिशन उनके करियर का सबसे कठिन दौर साबित हुआ। साल 2024 में वह बोइंग के नए स्टारलाइनर कैप्सूल की पहली परीक्षण उड़ान के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन गई थीं। यह मिशन सिर्फ 8 दिनों का था, लेकिन तकनीकी खराबी के कारण वह और उनके साथी बुच विलमोर वहां फंस गए।
करीब 9 महीने तक अंतरिक्ष स्टेशन पर रहने के बाद वे मार्च 2025 में सुरक्षित पृथ्वी पर लौट सकीं। इस मिशन ने न केवल उनकी मानसिक और शारीरिक क्षमता की परीक्षा ली, बल्कि उनके नेतृत्व कौशल को भी नई पहचान दी।
NASA की भावुक विदाई
नासा के एडमिनिस्ट्रेटर जेरेड आइजैकमैन ने विदाई संदेश में कहा कि सुनीता विलियम्स ने अंतरिक्ष स्टेशन पर अपने नेतृत्व और अनुभव से भविष्य के मिशनों की दिशा तय की। उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों को बड़े सपने देखने की प्रेरणा देती रहेंगी।
भारत दौरे में भावनात्मक पल
सेवानिवृत्ति के बाद भारत पहुंचीं सुनीता विलियम्स ने दिल्ली में दिवंगत अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला के परिवार से मुलाकात की। उन्होंने कल्पना चावला की मां संयोगिता चावला और बहन दीपा से मिलकर भावुक क्षण साझा किए और संपर्क में बने रहने की बात कही।
एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि भारत लौटना उनके लिए हमेशा घर वापसी जैसा होता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर बिताए अनुभव, मानसिक स्वास्थ्य, अंतरिक्ष मलबा और स्पेस सेक्टर के निजीकरण जैसे विषयों पर भी खुलकर बात की।
सुनीता विलियम्स की विदाई केवल नासा के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के अंतरिक्ष प्रेमियों के लिए एक प्रेरणादायक युग के समापन की तरह है।

