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Ranchi News : रांची में 1.42 करोड़ रुपए की जमीन धोखाधड़ी मामले में छह आरोपियों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। रांची सिविल कोर्ट स्थित सीआईडी की विशेष अदालत ने आरोपियों की ओर से दायर अग्रिम जमानत याचिका को सुनवाई के बाद खारिज कर दिया है। इस मामले में सीआईडी थाना कांड संख्या 09/2025 के तहत नामजद आरोपियों में चार महिलाएं लीलावती देवी, सुधा कुमारी, ममता गुप्ता, अन्नपूर्णा गुप्ता के साथ अयोध्या प्रसाद गुप्ता और रजत गुप्ता शामिल हैं।
यह विवाद 11.1 डिसमिल जमीन के स्वामित्व से जुड़ा है। मामले के सूचक शंकर लाल गुप्ता का आरोप है कि अगस्त 2022 में 5.5 डिसमिल जमीन की बिक्री के लिए 2.35 करोड़ रुपए का एकरारनामा हुआ था, जिसमें उन्होंने अग्रिम तौर पर 1.42 करोड़ रुपए का भुगतान भी कर दिया था। लेकिन आरोपियों ने न तो विक्रय विलेख (सेल डीड) निष्पादित किया और न ही उन्हें जमीन पर कब्जा लेने दिया।
सूचक का दावा है कि आरोपियों ने अन्य सह-अभियुक्तों के साथ मिलकर जाली दस्तावेज तैयार किए और अवैध तरीके से जमीन का रजिस्टर्ड डीड करा लिया। भूमि माफियाओं के इस कथित खेल में फर्जी कागजातों के सहारे करोड़ों की ठगी की गई।
अदालत ने पाया कि भूमि स्वामित्व को लेकर दावा-प्रतिदावा मौजूद है और इसी मामले में सह-अभियुक्तों की जमानत पहले भी खारिज हो चुकी है। गंभीर आरोपों और लंबित जांच को देखते हुए अदालत ने अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।
इस मामले में पहले भी कई नाम सामने आए हैं। सुमन कुमार, रूपेश जायसवाल और प्रीतम साव की जमानत याचिका अदालत पहले ही खारिज कर चुकी है। सीआईडी इस पूरे प्रकरण की गहन जांच कर रही है और माना जा रहा है कि जांच के दौरान और भी खुलासे हो सकते हैं।
यह मामला न सिर्फ एक बड़े जमीन विवाद का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि किस तरह से जाली दस्तावेजों और फर्जीवाड़े के सहारे करोड़ों की ठगी की जाती है। अदालत का यह फैसला साफ संकेत देता है कि गंभीर आर्थिक अपराधों में कानून सख्त रुख अपनाने के लिए तैयार है।

