रांची: राजधानी के प्रतिष्ठित रांची विश्वविद्यालय (RU) में इन दिनों सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। शैक्षणिक सत्र में देरी, बुनियादी सुविधाओं का अभाव और प्रशासनिक अव्यवस्था ने छात्रों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। इसी कड़ी में 27 अप्रैल 2026 को झारखंड NSUI के प्रदेश उपाध्यक्ष अमन अहमद और DSPMU अध्यक्ष आर्यन कुमार के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने रांची विश्वविद्यालय की कुलपति से मुलाकात की।
NEP के नाम पर असमंजस और लचर शैक्षणिक सत्र
कुलपति को सौंपे गए आवेदन में अमन अहमद ने सीधे तौर पर विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति (NEP) को बिना किसी ठोस तैयारी के लागू कर दिया गया है। इससे न केवल छात्र बल्कि शिक्षक भी असमंजस में हैं। सिलेबस से लेकर क्लासरूम तक की कोई स्पष्ट रणनीति नहीं है। साथ ही, शैक्षणिक सत्रों का नियमित न होना छात्रों के कॅरियर के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है।
एक अधिकारी और कई कुर्सियां : प्रशासनिक ‘जंग’
आवेदन में प्रशासनिक व्यवस्था पर तंज कसते हुए कहा गया कि विश्वविद्यालय में योग्य अधिकारियों की भारी कमी है। हैरानी की बात यह है कि कई महत्वपूर्ण पदों पर एक ही व्यक्ति का कब्जा है, जिससे कार्यप्रणाली सुस्त हो गई है। शिक्षकों और गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं, जिसे भरने के लिए कोई ठोस पहल नहीं दिख रही है।
शौचालय से लेकर स्कॉलरशिप तक का संकट
छात्र नेताओं ने कुलपति का ध्यान विश्वविद्यालय की उन बुनियादी समस्याओं की ओर भी दिलाया जो शर्मनाक हैं। परिसर में शौचालय और शुद्ध पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है। इसके अलावा, आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को मिलने वाली छात्रवृत्ति का समय पर भुगतान नहीं हो रहा है, जिससे उनकी पढ़ाई बीच में ही छूटने की नौबत आ गई है।
क्षेत्रीय भाषाओं और शोध कार्य के साथ भेदभाव
झारखंड की अपनी जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं के प्रति विश्वविद्यालय का रवैया उदासीन नजर आता है। अमन अहमद ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि इन विषयों में पीएच.डी. मार्गदर्शकों (PhD Guides) की भारी कमी है। इसके कारण राज्य के जनजातीय गौरव से जुड़े शोध कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं। अंत में, NSUI ने कुलपति को चेतावनी भरे लहजे में आग्रह किया कि यदि इन समस्याओं पर अविलंब ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो छात्र संगठन उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा।



