Ranchi News: राजधानी रांची के डोरंडा स्थित मजिस्ट्रेट कॉलोनी का एक घर इन दिनों मातम में डूबा है। इस घर का इकलौता सहारा रहे रांची नगर निगम के कर संग्रहकर्ता (टैक्स कलेक्टर) नकुल तिर्की अब इस दुनिया में नहीं हैं। बीते 21 अगस्त की दोपहर करीब एक बजे बीमारी से जूझते हुए उनकी मौत हो गई। लेकिन उनकी पत्नी सरिता तिर्की का कहना है कि पति की मौत बीमारी से नहीं, बल्कि नगर निगम के कुछ अधिकारियों की लापरवाही से हुई।
सरिता तिर्की ने बताया कि उनके पति की तबीयत अचानक बिगड़ने पर उन्हें सीएमसी वेल्लोर ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने तत्काल ऑपरेशन की सलाह दी। मगर आर्थिक तंगी के कारण ऑपरेशन नहीं हो सका। नकुल तिर्की ने 9 जून 2015 से 31 जुलाई 2025 तक अर्जित अवकाश का आवेदन निगम में दिया था। अगर यह छुट्टी समय पर स्वीकृत कर दी जाती, तो उससे मिलने वाली रकम इलाज के लिए मददगार होती। लेकिन अधिकारियों ने फाइल दबाकर रख दी, जिसके कारण इलाज रुक गया।
सरिता ने कहा कि पैसों की कमी के चलते वे पति को वेल्लोर से वापस रांची लेकर आए। पहले मेदांता और फिर रिम्स में इलाज कराया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इलाज के दौरान ही नकुल तिर्की ने दम तोड़ दिया।
आंसुओं से भरी आंखों से सरिता बताती हैं कि अब उन्हें अपने तीन बच्चों के भविष्य की चिंता सता रही है। बड़ी बेटी उर्सुलाइन कॉन्वेंट में पढ़ती है, छोटी बेटी लाला लाजपत राय स्कूल में और बेटा फिरायालाल पब्लिक स्कूल का छात्र है। सरिता कहती हैं— “मेरे पति की मौत का जिम्मेदार नगर निगम है। अगर समय पर छुट्टी मंजूर कर दी जाती, तो मैं इलाज करा सकती थी और आज मेरे बच्चे पिता के साए से महरूम नहीं होते।”
सरिता तिर्की ने दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई, 50 लाख रुपये मुआवजा, पारिवारिक पेंशन और अनुकंपा पर नौकरी की मांग की है। इन मांगों को लेकर मंगलवार को वह रांची नगर निगम के मुख्य द्वार पर धरने पर बैठ गईं। उनकी इस लड़ाई में निगम के कई कर्मचारी और स्थानीय लोग भी साथ दे रहे हैं।



