India News: ब्राजील के राष्ट्रपति लूला और यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन करने के पीछे कई अहम वजहें हैं। ये दोनों नेता अलग-अलग कारणों से पीएम मोदी से संपर्क कर रहे हैं, लेकिन उनकी रणनीति का मूल एक ही है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के बढ़ते प्रभाव का लाभ उठाना और अपनी समस्याओं के समाधान में भारत की मदद लेना।

ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा ने पीएम मोदी को उस समय में फोन किया है, जब अमेरिका ने कई देशों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने की बात कही है। इस टैरिफ से भारत और ब्राजील, दोनों ही प्रभावित हैं। ब्राजील चाहता है कि भारत ब्रिक्स जैसे मंचों का इस्तेमाल करके अमेरिका की एकतरफा नीतियों का मुकाबला करे। ब्राजील और भारत दोनों ही ब्रिक्स के संस्थापक सदस्य हैं। लूला को उम्मीद है कि भारत अपनी राजनयिक ताकत और वैश्विक प्रभाव का उपयोग करके टैरिफ युद्ध को संतुलित कर सकता है।

दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के नाते, भारत में ट्रंप की नीतियों को प्रभावित करने की क्षमता है। ब्राजील चाहता है कि जब भारत अपने केस की पैरवी करे, तब वह ब्राजील के हितों का भी ध्यान रखे। यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की का पीएम मोदी को फोन करना, एक अलग लेकिन उतना ही महत्वपूर्ण मुद्दा है। ज़ेलेंस्की को डर है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और पुतिन के बीच होने वाली बैठक में यूक्रेन को दरकिनार किया जा सकता है। भारत के रूस और पश्चिमी देशों, दोनों के साथ अच्छे संबंध हैं। ज़ेलेंस्की को उम्मीद है कि पीएम मोदी युद्धविराम वार्ता में यूक्रेन की स्थिति को मजबूत करने में मदद कर सकते हैं। जेलेंस्की चाहते हैं कि कोई भी समझौता यूक्रेन की भागीदारी के बिना न हो। वह पीएम मोदी से आग्रह कर रहे हैं कि वे उनकी चिंताओं को वैश्विक मंच पर रखें, ताकि यूक्रेन के हितों की अनदेखी न की जाए।

ब्राजील और यूक्रेन, दोनों के नेताओं को पता है कि ट्रंप की आक्रामक और अप्रत्याशित विदेश नीति से अंतरराष्ट्रीय संबंध अनिश्चित हो गए हैं। इसके बाद भारत की वैश्विक विश्वसनीयता और संतुलित विदेश नीति उसे एक महत्वपूर्ण डीलब्रेकिंग स्थिति में ले आती है। इसकारण ये नेता अपनी समस्याओं के समाधान के लिए लगातार पीएम मोदी से संपर्क साध रहे हैं। वे भारत के बढ़ते प्रभाव का उपयोग करके अपनी चुनौतियों का सामना करना चाहते हैं।

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