New Delhi: रंगों से भरा होली का उत्सव समाप्त होते ही अब कुदरत ने अपने अलग रंग बिखेरना शुरू कर दिए हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में इस वक्त मौसम के तीन बिल्कुल जुदा रूप दिखाई दे रहे हैं। एक तरफ जहां कुछ राज्यों में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ रही है, वहीं दूसरी ओर कहीं बारिश तो कहीं बर्फबारी की संभावना बनी हुई है। महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे राज्य अभी से भीषण गर्मी और लू (हीटवेव) की चपेट में आ गए हैं, जबकि उत्तर भारत के पहाड़ों पर बर्फबारी और पूर्वी भारत में आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के आंकड़े डराने वाले हैं, जो बताते हैं कि गर्मी ने इस साल वक्त से पहले ही अपने तीखे तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं।

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महाराष्ट्र का विदर्भ क्षेत्र इस समय देश का सबसे गर्म इलाका बना हुआ है। अकोला में अधिकतम तापमान 40.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है, जो सामान्य से करीब 4.8 डिग्री अधिक है। अमरावती, वर्धा और वाशिम जैसे शहरों में भी पारा 40 डिग्री के करीब पहुंच चुका है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि मार्च की शुरुआत में ही गर्मी का यह स्तर आने वाले महीनों के लिए एक गंभीर संकेत है। उधर, राजस्थान के बाड़मेर में भी पारा 38 डिग्री के पार जा चुका है, जिससे मरुधरा में अभी से भारी तपिश महसूस होने लगी है।

दूसरी ओर, उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों में एक नया ‘पश्चिमी विक्षोभ’ सक्रिय हो गया है। इसके असर से जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचे इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी की उम्मीद है। इस बदलाव की वजह से दिल्ली-एनसीआर, पंजाब और हरियाणा जैसे मैदानी इलाकों में सुबह-शाम तो हल्की ठंडक बनी हुई है, लेकिन दोपहर की तेज धूप लोगों को बेहाल कर रही है। दिल्ली में पारा 34 से 36 डिग्री के बीच रहने का अनुमान है।

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उत्तर प्रदेश और बिहार में भी अब गर्मी अपना असर दिखाने लगी है। यूपी के बुंदेलखंड क्षेत्र में पारा 35 डिग्री के पार निकल गया है, वहीं बिहार और झारखंड में 9 से 11 मार्च के बीच मौसम पलटने के आसार हैं। मौसम विभाग के अनुसार, इन राज्यों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से धूलभरी हवाएं चल सकती हैं और गरज-चमक के साथ हल्की बूंदाबांदी भी हो सकती है। दक्षिण भारत में भी प्री-मानसून गतिविधियां शुरू हो गई हैं, जिससे केरल और तमिलनाडु के तटीय इलाकों में बारिश की संभावना बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि साफ आसमान और एंटी-साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण सूरज की किरणें सीधे धरती तक पहुंच रही हैं, जिससे तापमान में यह अचानक बढ़ोतरी देखी जा रही है।

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