Bihar News: पुनौराधाम (बिहार) में माता जानकी के भव्य मंदिर का शिलान्यास शुक्रवार, 8 अगस्त को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे। यह मंदिर अयोध्या में बने श्रीराम मंदिर की तर्ज पर बिहार के मिथिला क्षेत्र के पुनौराधाम में बनाया जा रहा है। इसे लेकर व्यापक स्तर पर तैयारियां चल रही हैं। कार्यक्रम की भव्यता और धार्मिक महत्ता को देखते हुए देशभर से श्रद्धालु, संत-महात्मा और विशिष्ट अतिथि जुटेंगे।
शिलान्यास कार्यक्रम की विशेषता यह है कि इसमें देश के 21 प्रमुख तीर्थ स्थलों की मिट्टी और 31 पवित्र नदियों का जल उपयोग में लाया जाएगा।
इसके अलावा जयपुर से विशेष चांदी का कलश भी मंगवाया गया है। दक्षिण भारत के प्रसिद्ध तिरुपति बालाजी मंदिर की तर्ज पर 50 हजार पैकेट प्रसाद के रूप में लड्डू तैयार किए जा रहे हैं। इन्हें बनाने के लिए दक्षिण भारत से पारंपरिक लड्डू विशेषज्ञ कारीगर बुलाए गए हैं। लड्डू निर्माण से पहले गंगा सहित 11 पवित्र नदियों के जल से इनका संकल्प स्नान भी कराया जाएगा।
जानकी मंदिर का निर्माण 67 एकड़ भूमि में होगा और इसकी ऊंचाई 151 फीट होगी।
इस प्रोजेक्ट को वर्ष 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। मंदिर परिसर को श्रद्धालुओं की सुविधा और धार्मिक अनुभव को ध्यान में रखते हुए अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा।
मंदिर में होंगी ये प्रमुख सुविधाएं:
-
यज्ञ मंडप
-
सीता वाटिका और लव-कुश वाटिका
-
संग्रहालय और ऑडिटोरियम
-
भजन संध्या स्थल
-
बच्चों के लिए खेल क्षेत्र
-
धर्मशाला, यात्री अतिथि गृह और डॉरमेट्री
-
मिथिला हाट, ई-कार्ट स्टेशन और विशाल पार्किंग
मंदिर परिसर में माता सीता से जुड़ी कहानियां, ऐतिहासिक साक्ष्य और सांस्कृतिक धरोहरों का प्रदर्शन भी किया जाएगा।
साथ ही, माता जानकी कुंड का भी भव्य सौंदर्यीकरण किया जाएगा ताकि यह तीर्थ न केवल श्रद्धा का केंद्र बने, बल्कि ज्ञान, संस्कृति और पर्यटन का भी संगम बने।
इस ऐतिहासिक मौके पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, कई केंद्रीय मंत्री, राज्यमंत्री, साधु-संत और हज़ारों श्रद्धालु उपस्थित रहेंगे।
इस परियोजना पर कुल 882 करोड़ 87 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। यह न सिर्फ धार्मिक भावनाओं को जोड़ने का माध्यम बनेगा, बल्कि मिथिला की सांस्कृतिक धरोहर को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाएगा।
इस मंदिर का निर्माण मिथिला क्षेत्र के गौरव को नयी ऊंचाई देगा और इसे रामायण कालीन धार्मिक महत्व के स्थलों में एक नई पहचान मिलेगी।



