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Home»#Trending»मजदूरी 12 घंटे और सुरक्षा शून्य, विधायक ममता ने रोजगार और पलायन पर सरकार को घेरा
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मजदूरी 12 घंटे और सुरक्षा शून्य, विधायक ममता ने रोजगार और पलायन पर सरकार को घेरा

Muzaffar HussainBy Muzaffar HussainMarch 10, 20262 Mins Read
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रांची: झारखंड विधानसभा का बजट सत्र मंगलवार को उस वक्त गर्मा गया जब रामगढ़ की विधायक ममता देवी ने श्रम, नियोजन और उद्योग विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान राज्य के श्रमिक वर्ग की बदहाली का कच्चा चिट्ठा खोलकर रख दिया। उन्होंने सरकार की नीतियों और जमीनी हकीकत के बीच के बड़े अंतर को उजागर करते हुए कहा कि आज झारखंड का मजदूर अपने ही घर में असुरक्षित और शोषित महसूस कर रहा है।

कोयलांचल की सुलगती जमीन और ‘रंगदारी’ का खेल

विधायक ने धनबाद के झरिया का जिक्र करते हुए एक डरावनी तस्वीर पेश की। उन्होंने कहा कि एक तरफ झरिया की जमीन आग और भू-धसान (Land Subsidence) से सुलग रही है, तो दूसरी तरफ वहां का गरीब मजदूर अपनी जान जोखिम में डालकर रात भर कोयला ढोने को मजबूर है। दुखद पहलू यह है कि इतनी मेहनत के बाद भी उन्हें चैन की रोटी नसीब नहीं होती; बड़े ठेकेदार और असामाजिक तत्व उनसे ‘रंगदारी’ वसूलते हैं। विधायक ने सवाल किया कि आखिर प्रशासन इन बेबस मजदूरों को सुरक्षा देने में विफल क्यों है?

पलायन का दंश और शवों के लिए संघर्ष

झारखंड से होने वाले पलायन के मुद्दे पर ममता देवी भावुक नजर आईं। उन्होंने सरकार को याद दिलाया कि चुनाव से पहले 5 लाख युवाओं को रोजगार देने का वादा किया गया था, जो अब तक अधूरा है। उन्होंने एक कड़वी सच्चाई सामने रखते हुए कहा कि जब झारखंड का कोई श्रमिक दूसरे राज्य में काम के दौरान दम तोड़ देता है, तो उसके परिवार के पास इतने पैसे भी नहीं होते कि वे अपनों का शव वापस ला सकें। यह स्थिति राज्य के ‘कौशल विकास’ और ‘रोजगार’ के दावों पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है।

नियमों की धज्जियां : 8 के बदले 12 घंटे काम

श्रम कानूनों के उल्लंघन पर प्रहार करते हुए विधायक ने कहा कि कागजों पर काम के घंटे 8 तय हैं, लेकिन वास्तविकता में मजदूरों से 12-12 घंटे तक हाड़तोड़ मेहनत कराई जा रही है। उन्होंने श्रम विभाग के बजट को महज आंकड़ों का खेल बताते हुए पूछा कि जब युवा राज्य छोड़कर बाहर जा रहे हैं, तो इन योजनाओं का लाभ किसे मिल रहा है? उन्होंने मांग की कि सरकार केवल योजनाओं का उल्लेख न करे, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारकर युवाओं के पलायन को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए।

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