Ranchi: देहरादून के राजपुर रोड स्थित सिल्वर सिटी मॉल में शुक्रवार सुबह करीब 10:30 बजे जमशेदपुर के हिस्ट्रीशीटर विक्रम शर्मा पर तीन राउंड गोलियां चलाई गईं। दो गोलियां लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हमलावर बाइक से आए और वारदात के बाद फरार हो गए। पुलिस के अनुसार सुबह करीब सवा 10 से 10:30 बजे के बीच विक्रम शर्मा जिम से निकलकर मॉल की सीढ़ियों से नीचे उतर रहा था।
तभी पहले से घात लगाए दो शूटर उसके पास पहुंचे और नजदीक से फायरिंग कर दी। तीसरा आरोपी मुख्य सड़क पर बाइक के साथ निगरानी कर रहा था। हमला इतनी तेजी से हुआ कि विक्रम अपने पास मौजूद लाइसेंसी पिस्टल तक नहीं निकाल सका। पुलिस ने मृतक के पास से हथियार बरामद किया है। देहरादून में हुई विक्रम शर्मा की हत्या से जमशेदपुर के अपराध जगत को फिर से एक बार चर्चा में ला दिया है। दुमका जेल में बंद कुख्यात अपराधी अखिलेश सिंह की चर्चा होने लगी है, वहीं पुलिस सूत्रों के अनुसार अखिलेश को लेकर सतर्कता बरती जा रही है, अखिलेश की जेल में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
झारखंड के औद्योगिक शहर जमशेदपुर से उभरे कथित गैंगस्टर विक्रम शर्मा की देहरादून में हुई हत्या ने एक बार फिर देश के औद्योगिक शहरों में पनप रहे संगठित अपराध, आर्थिक नेटवर्क और अपराधियों द्वारा सामाजिक वैधता हासिल करने की रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
1990 के दशक में ट्रांसपोर्ट कारोबार से शुरुआत करने वाला विक्रम शर्मा धीरे-धीरे रंगदारी, गैंग नेटवर्क और आपराधिक मामलों के जरिए पुलिस रिकॉर्ड में एक प्रभावशाली नाम बन गया। हालांकि उसके खिलाफ दर्ज कई मामलों में अदालतों से उसे राहत भी मिली, जिससे उसका प्रभाव लंबे समय तक बना रहा।
ट्रांसपोर्ट कारोबार से अपराध जगत तक
पुलिस अधिकारियों के अनुसार विक्रम शर्मा की शुरुआती पहचान ट्रांसपोर्ट और सप्लाई नेटवर्क से जुड़ी थी। जमशेदपुर जैसे औद्योगिक शहर में माल ढुलाई, स्क्रैप परिवहन और ठेका आपूर्ति से जुड़े कारोबार आर्थिक रूप से संवेदनशील माने जाते हैं।
जांच एजेंसियों का आकलन है कि इसी आर्थिक नेटवर्क के जरिए उसका संपर्क स्थानीय कारोबारी समूहों और दबंग तत्वों से बढ़ा, जिसने आगे चलकर उसे विवाद निपटाने और दबाव की राजनीति में सक्रिय कर दिया। इसी दौरान विक्रम का संपर्क अखिलेश सिंह से हुआ और व्यापारिक संबंध अपराधिक हिस्सेदारी से होते हुए गुरु-शिष्य के रिश्ते तक पहुंचा। इसी दौर में एक ट्रांसपोर्टर की हत्या में विक्रम शर्मा का नाम आया। सूत्र बताते हैं कि यह भी आश्चर्य रहा की 302 जैसे संगीन मामला होते हुए बिस्टुपुर थाने से ही विक्रम शर्मा को जमानत दे दी गई थी।
संगठित गैंग नेटवर्क से जुड़ाव
क्राइम रिकॉर्ड में उसका नाम झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर अखिलेश सिंह के नेटवर्क से जुड़ा बताया गया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक वह कथित रूप से स्थानीय स्तर पर आर्थिक वसूली और नेटवर्क समन्वय से जुड़े कामों में सक्रिय रहा। हालांकि इन आरोपों में कई मामलों का अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अलग-अलग रहा।
चर्चित आपराधिक मामलों में नाम
वर्षों के दौरान उसका नाम कई हाई-प्रोफाइल मामलों में सामने आया:
2007 का आशीष डे हत्या मामला, जिसमें उसे आरोपी बनाया गया, लेकिन बाद में अदालत से राहत मिली।
जयराम सिंह हत्या केस, जिसमें जांच एजेंसियों ने उससे पूछताछ की।
ठेकेदारी और ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े कथित रंगदारी विवाद।
फर्जी दस्तावेज और संपत्ति लेनदेन से जुड़े मामले।
कानूनी जानकारों के अनुसार, कई मामलों में दोष सिद्ध न होने से उसकी आपराधिक छवि और वास्तविक कानूनी स्थिति के बीच अंतर बना रहा।
सामाजिक चेहरा बनाने की रणनीति
इधर पिछले दो वर्ष से स्थानीय स्तर पर विक्रम शर्मा की सार्वजनिक गतिविधियों में बढ़ती भागीदारी भी चर्चा का विषय रही। सामाजिक कार्यक्रमों में उपस्थिति, जरूरतमंदों की सहायता और सार्वजनिक आयोजनों में सक्रियता को विश्लेषक संगठित अपराध में अक्सर देखी जाने वाली रणनीति बताते हैं। अपराध जानकर के अनुसार, ऐसे प्रयासों का उद्देश्य होता है सामाजिक स्वीकार्यता बढ़ाना, स्थानीय समर्थन हासिल करना वैध पहचान बनाना। मालूम हो कि विक्रम शर्मा पिछले दो वर्षों से सिदगोड़ा सिनेमा मैदान दुर्गा समिति के संरक्षक भी थे जिसे अखिलेश सिंह दुर्गा पूजा पंडाल के नाम से भी जाना है, वही अखिलेश सिंह, जिसके गुरु के तौर पर विक्रम शर्मा को जाना जाता रहा है। इसके अलावा विक्रम पिछले दो वर्षों से लगातारा जमशेदपुर में सामाजिक तौर पर सक्रिय थे, पिछले दिनों एक विधायक से उनके कार्यालय में हुई मुलाक़ात भी काफी चर्चा में थी. साथी पूर्व मुख्यमंत्रियों, मंत्रियों से उसका लगातार मिलना जुलना था।
अपराधियों और नशा के खिलाफ सोशल पेज पर थी सक्रियता
विक्रम शर्मा सोशल मीडिया पर खूब एक्टिव था। ब्रांडिंग और प्रमोशनल वीडियो बनाने के लिए उसकी पूरी एक टीम थी। वहीं सोशल पेज पर संदेश के माध्यम से विक्रम शर्मा लगातार शहर के वैसे अपराधियों को चेतावनी देने का काम कर रहा था जो शहर में सक्रिय थे, हाल में कैरव गांधी अपहरण कांड में भी उसने अपराधिओं को खुली चेतावनी दिया था। वहीं, नशा के खिलाफ भी विक्रम शर्मा खुल कर लिखता था साथ ही युवाओं को नशा से दूर रहने की नसीहत भी दे रहा था।
अदालत और जांच एजेंसियों की चुनौती
पुलिस रिकॉर्ड में उसके खिलाफ दर्जनों मामले दर्ज बताए जाते हैं, लेकिन लंबी न्यायिक प्रक्रिया, गवाहों का मुकरना और साक्ष्य संबंधी चुनौतियां कई मामलों में अभियोजन के लिए बाधा बनीं।
कानून विशेषज्ञ मानते हैं कि संगठित अपराध से जुड़े मामलों में अंतरराज्यीय समन्वय और गवाह सुरक्षा आज भी बड़ी चुनौती है।
राज्य से बाहर ठिकाना और अंतिम हमला
जांच एजेंसियों के अनुसार कानूनी दबाव बढ़ने के बाद वह लंबे समय तक झारखंड से बाहर रह रहा था और देहरादून में उसका ठिकाना था।
13 फरवरी 2026 को देहरादून में अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर उसकी हत्या कर दी। शुरुआती जांच में घटना को आपसी गैंग रंजिश से जोड़कर देखा जा रहा है, हालांकि पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
औद्योगिक शहरों में अपराध का पैटर्न
विशेषज्ञों के अनुसार जमशेदपुर, धनबाद और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में अपराध अक्सर पारंपरिक गैंग हिंसा से अधिक आर्थिक नियंत्रण से जुड़ा होता है, जहां ठेके, ट्रांसपोर्ट और जमीन विवाद संगठित अपराध की जमीन बनते हैं।
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