Interesting News: समुद्र की गहराइयों में एक ऐसा जीव तैरता है जिसे देखने भर से सिहरन दौड़ जाए। काला चमकता शरीर, लाल या नीली आंखें और भुजाओं के बीच जाली जो किसी लबादे जैसी लगती है—यही है रहस्यमयी वैम्पायर स्क्विड। लेकिन इसका डरावना रूप ही इसकी पूरी कहानी नहीं है। इस जीव ने हाल ही में वैज्ञानिकों को और भी बड़ा झटका दिया है।

जीनोम में मिला करोड़ों वर्षों का रहस्य

यूनिवर्सिटी ऑफ विएना और जापान के शोधकर्ताओं ने बताया कि वैम्पायर स्क्विड का जीनोम अब तक का सबसे बड़ा सेफलोपोड जीनोम है। इसके डीएनए में 11 बिलियन बेस पेयर्स पाए गए—यानी इंसानों से चार गुना ज्यादा। हैरानी की बात यह है कि इतने लंबे समय में भी इसके जीन में बहुत कम बदलाव आया है। इसी वजह से वैज्ञानिक इसे ‘जीनोमिक लिविंग फॉसिल’ कहते हैं।

डरावना नाम, लेकिन शांत स्वभाव

अपनी शक्ल की वजह से इसे ‘वैम्पायर’ कहा जाता है, लेकिन यह न तो खून चूसता है और न ही शिकार करता है। यह मृत जीवों के अवशेष और जैविक कचरा खाकर समुद्र की सफाई करने में बड़ी भूमिका निभाता है। जापान में इसे ‘कोमोरी-डाको’ यानी ‘चमगादड़ ऑक्टोपस’ कहा जाता है।

विकास की खोई हुई कड़ी का बड़ा खुलासा

शोध में पता चला कि लगभग 30 करोड़ साल पहले सेफलोपोड दो समूहों में बंट गए थे। एक समूह में स्क्विड और कटेलफिश, जबकि दूसरे में ऑक्टोपस और वैम्पायर स्क्विड। नाम भले स्क्विड जैसा हो, लेकिन इसके पास ऑक्टोपस जैसी आठ भुजाएं हैं, जबकि इसका क्रोमोसोम ढांचा स्क्विड जैसा है। यानी यह दोनों प्रजातियों के बीच खोई हुई उस कड़ी जैसा है, जिसे वैज्ञानिक दशकों से तलाश रहे थे।

अध्ययन में इसकी तुलना पेपर नॉटिलस नामक एक विचित्र ऑक्टोपस प्रजाति से की गई, जिससे समुद्री विकास की शुरुआती कहानी और साफ हुई। शोध का सबसे बड़ा संदेश यही है—विकास सिर्फ नए जीन बनने से नहीं होता, कुछ पुराने जीन टिके रहते हैं और इतिहास अपने भीतर संभाले रहते हैं।

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