Health News: टाइप-2 डायबिटीज एक व्यापक रूप से फैली हुई जीवनशैली से जुड़ी बीमारी है, जिसे इंसुलिन के बिना भी नियंत्रित किया जा सकता है। हालांकि अचानक बढ़े हुए ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के लिए मेडिकेशन की जरूरत पड़ती है, परंतु लंबे समय तक इस बीमारी को मैनेज करने के लिए जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
फॉर्मूला सरल है—टाइप-2 डायबिटीज में ओरल मेडिकेशन का इस्तेमाल किया जाता है, जो ब्लड शुगर लेवल को कम करने में मदद करती हैं। डॉक्टर्स आमतौर पर डीपीपी-4 इनहेबिटर्स, मेग्लिटिनाइड्स, डोपामाइन-2 एगोनिस्ट, और अल्फा ग्लूकोसिडेज इनहेबिटर्स जैसी दवाएं सुझाते हैं। इनका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता और इन्हें नियमित लेने से आदत भी नहीं लगती।
जीवनशैली प्राथमिक
डायबिटीज को मैनेज करने में जीवनशैली का सबसे बड़ा योगदान होता है। इसके लिए जरूरी है कि मरीज संतुलित आहार लें, जिसमें कब्जानाशक और पोषक तत्वों की पर्याप्त मात्रा हो। ऐसा भोजन करें, जिससे रक्तशर्करा नियंत्रित रहे। अधिक देर तक पेट खाली नहीं रखना चाहिए क्योंकि इससे ब्लड शुगर बढ़ सकता है।
प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट की एक्सरसाइज जरूरी है, जिसमें वॉकिंग, साइकलिंग, रनिंग और एरोबिक्स शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा अच्छी नींद से भी ब्लड सुगर नियंत्रण में रहता है।
डायबिटीज एक लंबी बीमारी, सावधानी जरूरी
डायबिटीज लाइलाज बीमारी है, जो पूरे जीवन साथ रहती है। इसलिए नियमित चेकअप और सावधानी जरूरी है। कई बार भर्ती मरीजों को इंसुलिन की जरूरत पड़ सकती है, लेकिन बिना डॉक्टर की सलाह के असावधानी से इंसुलिन लेना सही नहीं। नई आदतें और जीवनशैली सुधार के साथ डायबिटीज को नियंत्रित किया जा सकता है।



