वॉशिंगटन (अमेरिका) | एजेंसी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस समय दोहरी चुनौतियों से घिरे हुए हैं। एक तरफ ईरान के साथ जारी सैन्य संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा, वहीं दूसरी तरफ खुद अमेरिकी जनता ने युद्ध और बढ़ती महंगाई के खिलाफ आवाज बुलंद कर दी है। हालिया ‘AP-NORC’ पोल के मुताबिक, अर्थव्यवस्था और मिडिल ईस्ट संकट को संभालने में ट्रंप की रेटिंग गिरकर 30-33% तक पहुंच गई है। अमेरिकी जनता में यह असंतोष विशेष रूप से पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के कारण है, जो अब आम आदमी की जेब पर भारी पड़ रही है।

होर्मुज में सन्नाटा और तेल का संकट: अंतरराष्ट्रीय शिपिंग आंकड़ों ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), जहां से शांति के समय रोजाना 125 से 140 जहाज गुजरते थे, वहां अब सन्नाटा पसरा है। पिछले 24 घंटों में इस रास्ते से केवल 7 जहाज गुजरे हैं, और चौंकाने वाली बात यह है कि उनमें से एक भी तेल टैंकर नहीं था। इस मार्ग से दुनिया का करीब 20% तेल व्यापार होता है, जिसके ठप होने से कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतें $90 से $115 प्रति बैरल के बीच झूल रही हैं।

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अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई और ईरान का पलटवार: रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी नौसेना ने एक सख्त नौसैनिक नाकाबंदी (Naval Blockade) लागू कर दी है। पिछले कुछ दिनों में ईरान का कच्चा तेल लेकर जा रहे कम से कम 6 टैंकरों को अमेरिकी सेना ने रास्ता बदलने पर मजबूर किया है। हाल ही में ‘Majestic X’ जैसे टैंकरों को जब्त करने की खबरों ने आग में घी डालने का काम किया है। ईरान ने इसे ‘खुली लूट’ करार देते हुए चेतावनी दी है कि यदि उसके व्यापारिक जहाजों को रोका गया, तो वह इस जलमार्ग को पूरी तरह ‘डेड ज़ोन’ बना देगा।

ट्रंप पर घरेलू दबाव: अमेरिका के भीतर न केवल विपक्षी बल्कि ट्रंप के अपने समर्थक भी अब युद्ध की लंबी अवधि पर सवाल उठा रहे हैं। ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने हाल ही में संकेत दिया है कि पेट्रोल की कीमतें फिलहाल $3 प्रति गैलन से नीचे आने की उम्मीद नहीं है। इस बयान ने आग में तेल का काम किया है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि ट्रंप ने जल्द ही ‘ईरान के परमाणु कार्यक्रम’ बनाम ‘युद्धविराम’ के गतिरोध को नहीं सुलझाया, तो आने वाले मिडटर्म चुनावों में उन्हें और उनकी पार्टी को भारी राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

परमाणु बनाम शांति की जंग

फिलहाल कूटनीति के केंद्र में दो ही मुद्दे हैं—ईरान चाहता है कि पहले उसकी सुरक्षा की गारंटी और युद्धविराम हो, जबकि अमेरिका परमाणु कार्यक्रम को बंद किए बिना पीछे हटने को तैयार नहीं है। इस ‘ईगो वॉर’ (Ego War) में पिसा आम आदमी रहा है, क्योंकि तेल की सप्लाई चेन टूटने से पूरी दुनिया में महंगाई का खतरा मंडरा रहा है।

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