World News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपनी इमिग्रेशन और वीज़ा नीतियों को लेकर अंतर्राष्ट्रीय सुर्खियों में हैं। ट्रंप प्रशासन ने अब एक चौंकाने वाला कदम उठाते हुए ‘ट्रंप गोल्ड कार्ड’ पेश किया है। यह एक महंगा इमिग्रेशन प्रोग्राम है जिसे ऐसे लोगों और कंपनियों को स्थायी कानूनी दर्जा और अमेरिकी नागरिकता देने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो इसके लिए एक बड़ी रकम खर्च कर सकते हैं।
ट्रंप प्रशासन का दावा है कि इस गोल्ड कार्ड योजना से दुनिया भर के प्रतिभाशाली लोग अमेरिका आएंगे और इससे देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इस नई पहल की घोषणा करते हुए लिखा, “अमेरिकी सरकार का ट्रंप गोल्ड कार्ड आज यहाँ है। यह सभी योग्य और सत्यापित लोगों के लिए नागरिकता का सीधा रास्ता है। हमारी बड़ी अमेरिकी कंपनियाँ आखिरकार अपनी अमूल्य प्रतिभा को बनाए रख सकेंगी।”
गोल्ड कार्ड: EB-5 वीज़ा का बदला हुआ रूप या कुछ और?
ट्रंप की यह चौंकाने वाली घोषणा उनके सख्त आप्रवासन नियमों के बीच आई है। इस योजना को तीन दशक पुराने ईबी-5 निवेशक वीज़ा का विकल्प माना जा रहा है। गोल्ड कार्ड के तहत, विदेशी नागरिक निजी तौर पर 10 लाख डॉलर (लगभग 8.3 करोड़ रुपये) या अपनी कंपनियों के माध्यम से 2 मिलियन डॉलर का निवेश करके अमेरिका में स्थायी निवास (परमानेंट रेजिडेंस) हासिल कर सकेंगे।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह असल में एक बदले हुए ग्रीन कार्ड की तरह है। गोल्ड कार्ड धारकों को अमेरिका में अनिश्चित काल तक रहने और काम करने का स्थायी कानूनी दर्जा मिलेगा, और वे भविष्य में नागरिकता के लिए भी आवेदन कर सकेंगे। मौजूदा ग्रीन कार्ड में $800,000 से निवेश शुरू होता है और नौकरी पैदा करना अनिवार्य शर्त होती है। वहीं गोल्ड कार्ड के लिए 1 मिलियन डॉलर का आधार संस्करण अनिवार्य है, और यह पुराने तरीकों को दरकिनार करते हुए तेजी से मंजूरी का रास्ता खोलता है।
गोल्ड कार्ड कार्यक्रम में EB-1 या EB-2 वीज़ा श्रेणियों के तहत कानूनी स्थायी निवासी का दर्जा मिलेगा। इसके आवेदन में $15,000 का जांच शुल्क शामिल है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह उन बड़ी पूंजी वाली कंपनियों के लिए अधिक फायदेमंद है जो अपनी अमूल्य प्रतिभा को अमेरिका में स्थायी रूप से रखना चाहती हैं।



