रांची : डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के आदिवासी छात्र संघ ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की नई अधिसूचना ‘प्रोमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन्स रेगुलेशन्स 2026’ का खुलकर समर्थन किया है। छात्र संघ ने इसे भारतीय उच्च शिक्षा व्यवस्था में समानता, गरिमा और सामाजिक न्याय को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी पहल बताया है।
आदिवासी छात्र संघ के अध्यक्ष विवेक तिर्की ने मंगलवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि यह विनियम 13 जनवरी 2026 से देशभर के सभी यूजीसी से संबद्ध विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में लागू हो चुका है। उनका कहना है कि इसका प्रभाव केवल नीतिगत नहीं बल्कि व्यवहारिक स्तर पर भी देखने को मिलेगा।
विवेक तिर्की ने कहा कि संविधान समानता और भेदभाव से मुक्ति की गारंटी देता है, इसके बावजूद दलित, आदिवासी, पिछड़े और वंचित वर्गों के छात्रों को आज भी उच्च शिक्षा परिसरों में जातिगत भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न और संस्थागत उपेक्षा जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। नई विनियमावली इन्हीं जमीनी सच्चाइयों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।
नए नियमों के तहत हर उच्च शिक्षण संस्थान में समान अवसर केंद्र, समता समिति और समता दस्ता का गठन अनिवार्य किया गया है। इसके साथ ही 24 घंटे सहायता केंद्र, पारदर्शी शिकायत निवारण तंत्र और नियमित निगरानी व्यवस्था लागू करने का भी प्रावधान है, जिससे छात्रों को समय पर न्याय मिल सके।
छात्र संघ ने सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन से अपील की है कि इन विनियमों को पूरी ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ लागू किया जाए, ताकि उच्च शिक्षा वास्तव में समावेशी और न्यायपूर्ण बन सके।



