Ranchi : झारखंड की राजधानी रांची के नगड़ी क्षेत्र में प्रस्तावित रिम्स-2 निर्माण को लेकर लगातार सियासी बवाल बढ़ता जा रहा है। एक ओर सरकार इसे राज्य की जनता के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं में बड़ा कदम बता रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दल भाजपा इसे आदिवासी जमीन हड़पने की साजिश करार दे रहा है। इसी विवाद ने रविवार को नया मोड़ ले लिया जब झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता चंपाई सोरेन को प्रशासन ने हाउस अरेस्ट कर लिया।
दरअसल, चंपाई सोरेन, जिन्हें उनके समर्थक ‘कोल्हान टाइगर’ के नाम से जानते हैं, ने ऐलान किया था कि वे 24 अगस्त को नगड़ी की उस जमीन पर हल चलाकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे। प्रशासन ने किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने के लिए नगड़ी की ओर जाने वाली सभी सड़कों पर बैरिकेडिंग कर दी और बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती कर दी गई। नतीजतन, ग्रामीणों और उनके समर्थकों का जमावड़ा तो हुआ, लेकिन सुरक्षा घेरे के चलते कोई भी विवादित स्थल तक नहीं पहुंच सका।
रिम्स-2 क्यों बना विवाद का कारण?
राज्य सरकार का दावा है कि रिम्स-2 के निर्माण से झारखंड की स्वास्थ्य सुविधाओं में क्रांतिकारी बदलाव आएगा। फिलहाल रिम्स पर अत्यधिक दबाव है। नए अस्पताल के निर्माण से मरीजों को आधुनिक उपचार और अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी। सरकार का मानना है कि यह कदम आम जनता के लिए वरदान साबित होगा। वहीं, भाजपा का कहना है कि इस परियोजना के नाम पर आदिवासी जमीन छीनी जा रही है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार विकास की आड़ में आदिवासी समुदाय के अधिकारों और उनकी जमीन को हड़पना चाहती है। भाजपा नेताओं ने इसे आदिवासी अस्मिता से जोड़ते हुए जोरदार विरोध दर्ज कराया है।
क्या इतिहास दोहराया जा रहा है?
नगड़ी का यह इलाका विवादों से नया नहीं है। वर्ष 2010 में जब नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी का निर्माण शुरू किया गया था, तब राज्य में भाजपा की ही सरकार थी और अर्जुन मुंडा मुख्यमंत्री थे। उस समय भी स्थानीय लोगों और विपक्षी दलों ने इसी तरह विरोध किया था। तब भी प्रशासन को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी थी। आज एक बार फिर वही स्थिति बनती नजर आ रही है, जिससे सवाल उठ रहा है कि क्या यह घटना इतिहास की पुनरावृत्ति है।
राजनीतिक गर्माहट और जनता की चिंता
भले ही यह विवाद राजनीतिक रंग ले चुका हो, लेकिन इससे नुकसान जनता का ही है। रिम्स-2 अस्पताल बनने से लाखों मरीजों को सुविधा मिलेगी। वर्तमान में स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव इतना अधिक है कि मरीजों को उचित उपचार के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि विपक्ष का यह विरोध यदि लंबे समय तक चलता है तो इसका खामियाजा आम जनता को उठाना पड़ेगा।
प्रशासन की सख्ती, स्थिति नियंत्रण में
तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए प्रशासन ने सख्ती बरती है। चंपाई सोरेन को घर में नजरबंद कर दिया गया ताकि स्थिति नियंत्रण से बाहर न हो। वहीं, ग्रामीणों की भारी भीड़ को रोकने के लिए चारों ओर पुलिस बल की तैनाती की गई है। जिला प्रशासन का कहना है कि लोगों की सुरक्षा और शांति व्यवस्था उनकी पहली प्राथमिकता है। नगड़ी में यह विवाद इस बात का संकेत है कि विकास और आदिवासी अधिकारों के बीच संतुलन बनाना राज्य सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। सवाल यह है कि क्या समाधान निकलेगा या यह विवाद और गहराता जाएगा।



