Jharkhand News: छत्तीसगढ़ समाज द्वारा गुरुवार को पूर्वी सिंहभूम में एक अनोखी और पारंपरिक रस्म ‘गुड्डा-गुड़िया’ की शादी बड़े धूमधाम और उत्साह के साथ मनाई गई। यह आयोजन न केवल बच्चों के मनोरंजन का माध्यम था, बल्कि एक सांस्कृतिक उत्सव के रूप में समाज को एकजुट करने का संदेश भी देता है।
हर वर्ष की तरह इस बार भी समाज के सभी वर्गों—बच्चों, महिलाओं और पुरुषों—ने इस सांस्कृतिक आयोजन में पूरे जोश के साथ हिस्सा लिया। परंपरा के अनुसार, गुड़िया को दुल्हन की तरह सजाया गया और शादी के पहले मेहंदी और हल्दी जैसी रस्में पूरी रीति-रिवाज के साथ निभाई गईं। महिलाएं और युवतियां पारंपरिक छत्तीसगढ़ी गीतों पर नाचती-गाती नजर आईं और एक-दूसरे को शादी की बधाई दी।
शाम होते-होते बारात निकाली गई जिसमें बच्चे गुड्डे को दूल्हे के रूप में सजाकर ले गए। ढोल-नगाड़ों के साथ बच्चे नाचते-गाते हुए बारात में शामिल हुए। रात में विवाह की रस्में निभाई गईं और पारंपरिक भोज का आयोजन किया गया जिसमें सैकड़ों की संख्या में लोग शामिल हुए।
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को छत्तीसगढ़ी संस्कृति और परंपराओं से परिचित कराना और उनमें सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति रुचि विकसित करना है। छत्तीसगढ़ समाज पिछले कई वर्षों से इस परंपरा को सहेजे हुए है और आज भी उतने ही उल्लास और श्रद्धा से इसका आयोजन करता है, जितना कभी पहले किया जाता था।
समाज के वरिष्ठ जनों का कहना है कि ऐसे आयोजन न केवल हमारी संस्कृति की झलक दिखाते हैं, बल्कि समाज में एकता और समर्पण की भावना को भी बढ़ावा देते हैं।



