लंदन/रांची : झारखंड सरकार के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने लंदन में आयोजित एक विशेष बैठक में राज्य की भूवैज्ञानिक क्षमता का प्रदर्शन किया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य झारखंड में मौजूद लिथियम, ग्रेफाइट, कोबाल्ट और रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REE) जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की ओर अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित करना था। बैठक में कैम्ब्रिज और बर्मिंघम जैसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों के साथ-साथ क्रिटिकल मिनरल्स एसोसिएशन (UK) के दिग्गजों ने भी हिस्सा लिया।

रणनीतिक महत्व और भविष्य की तैयारी

अपर मुख्य सचिव वंदना डाडेल और खान निदेशक राहुल कुमार सिन्हा ने विस्तृत प्रस्तुतीकरण के जरिए बताया कि कैसे कोडरमा-गिरिडीह का अभ्रक क्षेत्र और पलामू के ग्रेफाइट ब्लॉक्स वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं। झारखंड ने स्पष्ट किया कि वह अब कच्चे माल के निर्यात से आगे बढ़कर प्रसंस्करण (Processing) और मूल्य संवर्धन (Value Addition) पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

यह पहल न केवल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि झारखंड के स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी। बैठक का समापन एक साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ, जिसमें यूके और यूरोप के देशों ने झारखंड के साथ तकनीकी हस्तांतरण और जिम्मेदार खनन पद्धतियों में सहयोग करने की गहरी रुचि दिखाई।

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