तेहरान, (ईरान) | एजेंसी

ईरान-अमेरिका युद्ध में दो सप्ताह के सीजफायर की घोषणा होते ही तेहरान की सड़कें जश्न और गुस्से की दोहरी तस्वीर पेश कर रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सोशल मीडिया पर की गई इस घोषणा ने मिडिल ईस्ट में तनाव को अस्थायी राहत दी है, लेकिन ईरानी जनता इसे अपनी नैतिक जीत मान रही है। रात भर सड़कों पर उतरे हजारों लोग ईरानी झंडे लहराते हुए नारे लगा रहे थे, जो वायरल वीडियो में साफ दिखाई दे रहे हैं।

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जश्न का माहौल, नारों की गूंज

तेहरान के एंगेलाब स्क्वायर और तहरीर चौक जैसे प्रमुख स्थानों पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी। लोग कारों पर चढ़कर नाच रहे थे, ‘अल्लाहु अकबर’ और ‘अमेरिका मुर्दाबाद, इजरायल मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगा रहे थे। एक वीडियो में एक व्यक्ति विशेष रूप से नजर आया, जो भीड़ को उकसाते हुए ऊंची आवाज में नारे लगा रहा था – ‘समझौता करने वालों मुर्दाबाद!’। यह दृश्य सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जहां लोग इसे ईरान की विजय के प्रतीक के रूप में देख रहे हैं। बगदाद से भी इसी तरह के जश्न की रिपोर्टें आईं, जहां इराकी समर्थकों ने परेड निकाली।

अमेरिकी रियायतों पर विश्वास

ईरानियों का मानना है कि सीजफायर अमेरिका की हार है, जिसमें प्रतिबंधों में ढील और रणनीतिक समझौते शामिल हैं। पाकिस्तानी नेताओं की मध्यस्थता से बने इस समझौते ने 40 दिनों के संघर्ष को विराम दिया। हालांकि, कुछ रिपोर्टों में कहा गया कि हमले पूरी तरह रुक नहीं पाए हैं, फिर भी तेहरान में पार्कों और कैफे में राहत का माहौल दिखा। जनता ने इसे क्षेत्रीय एकजुटता की नई लहर बताया।

भविष्य की अनिश्चितता

कई प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका-इजरायल के खिलाफ गुस्सा जाहिर किया, यहां तक कि उनके झंडे जलाए गए। विशेषज्ञों का कहना है कि यह अस्थायी विराम है, और लेबनान जैसे क्षेत्रों में तनाव बरकरार है। भारत जैसे देशों के लिए यह संकट ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार पर असर डाल सकता है। कुल मिलाकर, तेहरान की सड़कें जश्न मनाती हुईं एक व्यक्ति के नारों से गूंज रही थीं, जो पूरे क्षेत्र की भावनाओं का प्रतीक बने।

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