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Home»India»मुंह में चूहा और आंखों में आंसू: तमिलनाडु के किसानों का रूह कंपा देने वाला प्रदर्शन
India

मुंह में चूहा और आंखों में आंसू: तमिलनाडु के किसानों का रूह कंपा देने वाला प्रदर्शन

त्रिची में सूखा राहत और कर्ज माफी की मांग को लेकर किसानों ने मुंह में जिंदा चूहे दबाकर प्रदर्शन किया। पी. अय्याकन्नु के नेतृत्व में अन्नदाताओं ने सरकार को अपनी बदहाली दिखाई।
Shamsul HaqBy Shamsul HaqJanuary 31, 2026No Comments2 Mins Read
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अपनी भाषा चुनेें :

Trichy (Tamil Nadu): तमिलनाडु की लाल मिट्टी आज पसीने से नहीं, बल्कि बेबसी के आंसुओं से गीली है। त्रिची के कलेक्टर कार्यालय के सामने शनिवार को एक ऐसा मंजर दिखा, जिसने वहां से गुजरने वाले हर शख्स के कदम ठिठका दिए। यह कोई साधारण धरना नहीं था; यह उन हाथों की चीख थी जो देश का पेट भरते हैं, लेकिन आज खुद खाली पेट रहने को मजबूर हैं।

इस खबर को भी पढ़ें : किसान आंदोलनकारियों ने CO को बंधक बनाया, पुलिस ने लाठी चार्ज कर खदेड़ा

जब अन्नदाता के हाथों में हल की जगह चूहे आ गए

देसिया थेनिधिया नाथिगल इनाइप्पु विवासयिगल संगम के अध्यक्ष और चर्चित किसान नेता पी. अय्याकन्नु के नेतृत्व में सैकड़ों किसानों ने मोर्चा खोला। प्रदर्शन का तरीका इतना वीभत्स और हृदयविदारक था कि देखने वालों की रूह कांप गई। कई किसान कड़कड़ाती धूप में बिना शर्ट के, माथे पर पट्टी बांधे अर्धनग्न अवस्था में जमीन पर बैठे थे, और उनके मुंह में दबे थे—चूहे।

“साहब, चावल नहीं है तो क्या चूहा खाएं?”

किसानों का दर्द उनकी आंखों और उनके नारों में साफ झलक रहा था। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि भीषण सूखे ने उनकी फसलों को राख कर दिया है। सरकार की बेरुखी पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा, “जब हमारे पास उगाने के लिए पानी नहीं और खरीदने के लिए पैसे नहीं, तो क्या सरकार चाहती है कि हम चावल की जगह चूहे खाकर अपना पेट भरें?”

किसानों की मांगें पुरानी हैं लेकिन उनकी स्थिति नई और बदतर होती जा रही है। दक्षिण भारतीय नदियों को जोड़ने, पूर्ण कर्ज माफी, सूखे के लिए विशेष राहत पैकेज और फसलों के लिए लागत से दोगुना लाभकारी मूल्य की मांग को लेकर यह प्रदर्शन अब अगले 15 दिनों तक जारी रहेगा।

गौरतलब है कि ये वही किसान हैं जो पिछले नवंबर में दिल्ली की सड़कों पर अपनी आवाज बुलंद करने पहुंचे थे, लेकिन वहां उन्हें राहत के बदले नागपुर रेलवे पुलिस द्वारा दर्ज किए गए मुकदमे मिले। आज त्रिची की सड़कों पर यह विरोध केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि व्यवस्था के गाल पर एक करारा तमाचा है कि आखिर हमारा अन्नदाता इस मोड़ पर क्यों खड़ा है?

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