India News: अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी के भारत दौरे के दौरान आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला पत्रकारों को प्रवेश न दिए जाने को लेकर बहस तेज हो गई है। शुक्रवार को अफगान दूतावास, नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला मीडिया कर्मियों की एंट्री रोक दी गई थी, जिससे मीडिया और राजनीतिक गलियारों में खासा विवाद खड़ा हो गया।

विदेश मंत्रालय (MEA) ने खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए सफाई दी कि यह कार्यक्रम अफगान दूतावास द्वारा आयोजित किया गया था और वह भारत सरकार के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। सूचनाओं के मुताबिक, प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया पहुंच भी सीमित रही—सिर्फ 15-16 पत्रकारों को ही बुलाया गया और अधिकांश पत्रकारों को तो सूचना तक नहीं दी गई। महिलाओं की गैरमौजूदगी और कुछ महिला पत्रकारों को रोकने का मुद्दा सोशल मीडिया पर छाया रहा।

कई महिला पत्रकारों ने लिखा कि वे निर्धारित ड्रेस कोड में वहां पहुंचीं थी बावजूद इसके उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया। विपक्ष की ओर से कांग्रेस ने भी सवाल उठाए—प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रधानमंत्री मोदी से खुलकर स्पष्ट स्थिति रखने की अपील की। उन्होंने इसे महिलाओं के अपमान और लोकतंत्र के खिलाफ बताया।

मुत्ताकी गुरुवार को दिल्ली आए और भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बैठक की, जिसमें द्विपक्षीय व्यापार, विकास, क्षेत्रीय मुद्दों और क्षमता निर्माण जैसे विषयों पर चर्चा हुई। बातचीत के बाद अफगान मंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस इसलिए ज्यादा महत्वपूर्ण मानी गई थी।

हालांकि, आयोजन के दौरान मीडिया को सीमित पहुंच, महिला पत्रकारों की निषेध और पारदर्शिता के अभाव पर पत्रकारों और राजनीतिक दलों दोनों ने नाराज़गी जताई।

स्थिति पर एमईए की सफाई के बावजूद मामला अब भी विवादों में है, क्योंकि महिलाओं को न बुलाना, लोकतांत्रिक मूल्यों और मीडिया स्वतंत्रता पर सवाल खड़ा कर रहा है।

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