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New Delhi: टी20 विश्व कप 2026 की शुरुआत ने क्रिकेट जगत के उन तमाम पंडितों को खामोश कर दिया है, जो 20 टीमों के इस टूर्नामेंट को ‘एकतरफा’ मान रहे थे। टूर्नामेंट के शुरुआती मैचों ने यह साफ कर दिया है कि अब ‘एसोसिएट’ या तथाकथित कमजोर टीमें केवल हिस्सा लेने नहीं, बल्कि बड़ी टीमों का खेल बिगाड़ने के इरादे से मैदान में उतरी हैं।
भारत और पाकिस्तान: जीत मिली पर ‘सांसें’ अटकी रहीं
मेजबान और गत विजेता भारत की शुरुआत जीत के साथ तो हुई, लेकिन अमेरिका के खिलाफ टीम इंडिया एक समय गहरे संकट में थी। 118 रन पर 7 विकेट गंवाने के बाद कप्तान सूर्यकुमार यादव की 84 रनों की साहसी पारी ने भारत को शर्मिंदगी से बचाया। वहीं, पाकिस्तान को भी नीदरलैंड जैसी टीम के खिलाफ जीत के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ा। यदि नीदरलैंड ने फील्डिंग में गलतियां न की होतीं, तो नतीजा कुछ और ही होता।
नेपाल का ऐतिहासिक संघर्ष: इंग्लैंड के माथे पर आया पसीना
रविवार का दिन नेपाल के नाम रहा। इंग्लैंड जैसी वर्ल्ड क्लास टीम के खिलाफ 185 रनों का पीछा करते हुए नेपाल ने 180 रन बना डाले। मुकाबला आखिरी ओवर तक गया, जहाँ सैम करन के अनुभव ने इंग्लैंड को महज 4 रन से जीत दिलाई। नेपाल की इस ‘लड़ाकू’ पारी ने बता दिया है कि ग्रुप-सी में इंग्लैंड और वेस्टइंडीज के लिए रास्ता आसान नहीं होने वाला।
अफगानिस्तान की बढ़ती धमक
न्यूजीलैंड के खिलाफ अफगानिस्तान ने जिस तरह 182 रनों का स्कोर खड़ा किया और कीवी टीम के शुरुआती झटके दिए, वह उनकी बढ़ती मानसिक मजबूती का प्रमाण है। भारत के खिलाफ हालिया सीरीज से मिले अनुभव का फायदा अफगान खिलाड़ियों के खेल में साफ नजर आ रहा है।
ग्रुप स्टेज का रोमांच बढ़ा
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ग्रुप A: भारत को अब नामीबिया और अमेरिका से सावधान रहना होगा।
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ग्रुप B: श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया के लिए आयरलैंड-जिम्बाब्वे चुनौती पेश कर सकते हैं।
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ग्रुप D: दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड के बीच अफगानिस्तान एक बड़ा ‘फैक्टर’ बन चुका है।
टी20 विश्व कप 2026 अब केवल अनुभव का खेल नहीं रह गया है। छोटी टीमों के लिए यह हार-जीत से ज्यादा अपनी पहचान बनाने की लड़ाई है। जिस तरह के नतीजे अब तक सामने आए हैं, उससे यह उम्मीद और मजबूत हो गई है कि इस बार ग्रुप स्टेज में कुछ बड़े ‘दिग्गज’ बाहर हो सकते हैं।
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