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World News: ऑस्ट्रेलिया के सिडनी स्थित बॉन्डी बीच पर बीती 14 दिसंबर को जो हुआ, उसने दुनिया को दहला दिया, लेकिन इसी खौफ के बीच साहस की एक ऐसी दास्तां लिखी गई जिसने हर किसी की आंखों में आंसू और दिल में गर्व भर दिया। यह कहानी है 62 वर्षीय रुवेन मॉरिसन की, जिन्होंने यहूदी समुदाय के हनुक्का उत्सव के दौरान हुए आतंकी हमले में अपनी जान की परवाह न करते हुए सैकड़ों लोगों को मौत के मुंह से निकाल लिया।
जब आतंकियों की बंदूकों के सामने ईंट लेकर डट गए रुवेन मॉरिसन
जब दो आतंकी (बाप-बेटे) अंधाधुंध फायरिंग कर रहे थे, तब रुवेन भागे नहीं। उन्होंने पास पड़ी एक ईंट उठाई और मौत का तांडव कर रहे आतंकियों पर बरस पड़े।
बेटी बोली- ‘मेरे पिता लड़ते हुए गिरे, समुदाय की रक्षा की’
रुवेन की बेटी शीना गुटनिक ने भरे गले से बताया कि उनके पिता आतंकियों पर चिल्ला रहे थे और ईंटों से उन पर प्रहार कर रहे थे। रुवेन के इस प्रतिरोध ने वहां मौजूद भीड़ को भागने और छिपने के लिए कीमती चंद सेकंड दे दिए। एक स्थानीय रब्बी के अनुसार, रुवेन ने दर्जनों, शायद सैकड़ों यहूदियों की जान बचाई। वह तब तक डटे रहे जब तक उन्हें गोली नहीं मार दी गई।
इस कायराना हमले में 10 साल की मासूम बच्ची समेत 15 लोगों की जान जा चुकी है। पुलिस ने आतंकी पिता साजिद अकरम (54) को मौके पर ही ढेर कर दिया, जबकि बेटा नवीद अकरम अस्पताल में है। रुवेन, जो सोवियत संघ से आए एक दयालु व्यापारी थे, आज पूरे ऑस्ट्रेलिया के लिए बहादुरी का प्रतीक बन गए हैं। उन्होंने साबित कर दिया कि जब इरादे नेक हों, तो एक पत्थर भी बंदूक की गोली पर भारी पड़ता है।

