India News: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राज्य चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि बिहार में मतदाता सूची से हटाए गए 3.66 लाख मतदाताओं का पूरा ब्यौरा अदालत के रिकॉर्ड में प्रस्तुत किया जाए। यह मामला एसआईआर प्रक्रिया (Special Intensive Revision) के तहत हटाए गए नामों से जुड़ी याचिकाओं में सुनवाई के दौरान सामने आया।

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि चूंकि मसौदा मतदाता सूची और अंतिम सूची दोनों ही प्रकाशित हो चुकी हैं, इसलिए तुलनात्मक विश्लेषण के जरिए आवश्यक आंकड़े आसानी से उपलब्ध कराए जा सकते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची की पारदर्शिता और पहुंच को बढ़ाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए अहम है।

जस्टिस बागची ने चुनाव आयोग का पक्ष रखने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी से कहा, “आप सहमत होंगे कि हमारे आदेशों के बाद चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ी है। मसौदा सूची में 65 लाख नाम हटाए गए थे। मृतकों या स्थानांतरित लोगों के नाम हटाना उचित है, लेकिन बाकी मामलों में नियम 21 और एसओपी का पालन जरूरी है।”

अदालत ने निर्देश दिया कि जिनका नाम हटाया गया है, उनके आंकड़े जिले के निर्वाचन कार्यालयों में जमा कराए जाएं और यह स्पष्ट किया जाए कि अंतिम सूची में जो नए नाम जुड़े हैं, वे पुराने वोटर्स हैं या बिल्कुल नए।

चुनाव आयोग ने जवाब में बताया कि अंतिम सूची में जो नाम जोड़े गए हैं, उनमें ज्यादातर नए मतदाता हैं, जबकि कुछ पुराने वोटर भी हैं जिनके नाम मसौदा सूची प्रकाशित होने के बाद बहाल किए गए। आयोग के अनुसार, अब तक किसी भी हटाए गए मतदाता ने शिकायत या अपील नहीं की है।

सुप्रीम कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को करेगा, जिस दिन आयोग को कोर्ट में सभी विवरण पेश करना होगा।

Share.
Exit mobile version