रांची। झारखंड के आपराधिक गलियारों में सुजीत सिन्हा और प्रिंस खान के हाथ मिलाने की खबर ने पुलिस प्रशासन की नींद उड़ा दी है। जहां सुजीत सिन्हा सालों से जेल की सलाखों के पीछे रहकर अपना साम्राज्यचला रहा है, वहीं प्रिंस खान दुबई से ‘मेजर’ के नाम से रंगदारी का डिजिटल नेटवर्क ऑपरेट कर रहा है। इनके निशाने पर मुख्य रूप से कोयला कारोबारी और NHAI जैसी बड़ी निर्माण कंपनियां हैं। पुलिस के अनुसार, यह गठजोड़ न केवल सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी चुनौती है, बल्कि राज्य की कानून व्यवस्था के लिए एक नया खतरा बनकर उभरा है। अब पुलिस इन दोनों गिरोहों के वित्तीय स्रोतों और स्थानीय गुर्गों पर शिकंजा कसने की तैयारी में है।
अपराध का नया मॉडल : हाइब्रिड गैंग
पहले ये गिरोह अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय थे, लेकिन अब इन्होंने “रिसोर्स शेयरिंग” का मॉडल अपनाया है।
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ग्राउंड नेटवर्क (सुजीत सिन्हा): स्थानीय शूटरों की भर्ती, हथियारों की सप्लाई और ठिकानों की जानकारी सुजीत सिन्हा का गिरोह संभालता है।
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डिजिटल दहशत (प्रिंस खान): घटना के बाद इंटरनेट कॉलिंग के जरिए धमकी देना और विदेश से पैसे का ट्रांजेक्शन मैनेज करना प्रिंस खान का काम है।
जेल बनी ‘रिक्रूटमेंट सेंटर’
पलामू पुलिस की हालिया गिरफ्तारी से यह साफ हो गया है कि झारखंड की जेलें अब अपराधियों के लिए भर्ती केंद्र बन गई हैं। गिरफ्तार किए गए आठों अपराधी पहले अलग-अलग मामलों में जेल गए थे, जहाँ उनकी मुलाकात गिरोह के गुर्गों से हुई। कम उम्र के लड़कों को ‘विदेश भेजने’ या ‘बड़ा नाम बनाने’ का लालच देकर इस दलदल में धकेला जा रहा है।
पुलिस के सामने चुनौतियां
- छद्म नाम (Proxy Names): जैसा कि पलामू एसपी ने बताया, अपराधी अब पकड़े जाने पर दूसरे गैंग का नाम लेते हैं ताकि मुख्य सरगना बचा रहे।
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इंटरनेशनल लोकेशन: प्रिंस खान जैसे अपराधियों का ठिकाना देश के बाहर होने के कारण ‘रेड कॉर्नर नोटिस’ के बावजूद प्रत्यर्पण (Extradition) में समय लगता है।
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आधुनिक हथियार: देशी कट्टों की जगह अब इन गिरोहों के पास मुंगेर निर्मित अत्याधुनिक पिस्टल और मैगजीन पहुंच रही हैं।
प्रमुख गिरोह और उनके प्रभाव क्षेत्र
| गिरोह का नाम | मुख्य सरगना | सक्रिय क्षेत्र | मुख्य अपराध |
| सुजीत सिन्हा गैंग | सुजीत सिन्हा (जेल में) | पलामू, लातेहार, रांची | कोयला लेवी, ठेकेदारी में रंगदारी |
| प्रिंस खान गैंग | प्रिंस खान (विदेश में) | धनबाद, बोकारो | रंगदारी, जानलेवा हमले |



