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Washington, (US): धरती से बाहर मानव बस्तियां बसाने का सपना अब केवल कल्पना नहीं रह गया है, लेकिन इसके साथ ही एक गंभीर चुनौती सामने आई है—मानव प्रजनन। हाल ही में ‘इंटरनेशनल आईवीएफ इनिशिएटिव’ के विशेषज्ञों सहित नौ शोधकर्ताओं की एक टीम ने अंतरिक्ष यात्रा के प्रजनन स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों पर एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के अनुसार, अंतरिक्ष का वातावरण महिला प्रजनन क्षमता के लिए बेहद प्रतिकूल और हानिकारक साबित हो सकता है।
क्लीनिकल एम्ब्रियोलॉजिस्ट गाइल्स पामर के नेतृत्व में तैयार इस अध्ययन में बताया गया है कि अंतरिक्ष में मौजूद कॉस्मिक रेडिएशन (Cosmic Radiation) कोशिकाओं को स्थायी नुकसान पहुँचा सकता है, जिससे कैंसर और बांझपन का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण (Microgravity) महिलाओं के मासिक धर्म चक्र (Menstrual Cycle) को प्रभावित कर सकता है। हालांकि स्पेस शटल मिशनों के दौरान महिला अंतरिक्ष यात्रियों में गर्भधारण की दर सामान्य पाई गई थी, लेकिन मंगल जैसे लंबी अवधि के मिशनों के लिए अभी तक कोई ठोस चिकित्सा दिशानिर्देश या ‘इंडस्ट्री-ग्रेड प्रोटोकॉल’ मौजूद नहीं हैं।
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शोधकर्ताओं ने इसे ‘ज्ञान का सबसे बड़ा अंतर’ बताया है, क्योंकि मानव शरीर पर, विशेषकर पुरुष प्रजनन क्षमता पर अंतरिक्ष के दीर्घकालिक प्रभावों के आंकड़े बेहद सीमित हैं। जानवरों पर किए गए प्रयोग बताते हैं कि अंतरिक्ष की परिस्थितियां प्रजनन अंगों को नुकसान पहुँचाती हैं। भविष्य में इन जोखिमों को कम करने के लिए उन्नत असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART), जैसे ऑटोमेटेड आईवीएफ, अंडाणु और शुक्राणु फ्रीजिंग और जेनेटिक स्क्रीनिंग को एक संभावित समाधान के रूप में देखा जा रहा है। ये तकनीकें अब इतनी पोर्टेबल हो चुकी हैं कि इन्हें स्पेस क्राफ्ट में इस्तेमाल किया जा सकता है।
वैज्ञानिकों ने न केवल जैविक बल्कि नैतिक और नीतिगत खामियों पर भी चिंता जताई है। अंतरिक्ष में अनियोजित गर्भधारण या रेडिएशन के कारण होने वाली शारीरिक विकृतियों को लेकर फिलहाल कोई अंतरराष्ट्रीय नियम नहीं हैं। स्टडी चेतावनी देती है कि यदि समय रहते नीतियां नहीं बनाई गईं, तो भविष्य में “गवर्नेंस डिनाइड” की स्थिति पैदा हो सकती है, जहां बिना किसी सुरक्षा और नैतिक मापदंड के नई प्रथाएं शुरू हो जाएंगी।
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