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Washington, (US): एस्ट्रोनॉमी यानी खगोल विज्ञान में दिलचस्पी रखने वालों के लिए साल 2026 बेहद रोमांचक रहने वाला है। इस साल दो बड़ी खगोलीय घटनाएं दुनिया को हैरान करने वाली हैं। पहली घटना इसी महीने 17 फरवरी को ‘वलयाकार सूर्य ग्रहण’ (Annular Solar Eclipse) के रूप में होगी, जबकि दूसरी घटना 12 अगस्त को ‘पूर्ण सूर्य ग्रहण’ के रूप में दर्ज की जाएगी। दुनियाभर के विज्ञान प्रेमी इस अद्भुत नजारे का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
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क्या होता है ‘रिंग ऑफ फायर’?
वलयाकार सूर्य ग्रहण तब होता है जब सूरज, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीधी रेखा में आ जाते हैं। इस दौरान चंद्रमा पृथ्वी से अपनी अधिकतम दूरी (एपोजी) पर होता है। चंद्रमा का आकार छोटा दिखने के कारण वह सूरज को पूरी तरह से ढक नहीं पाता, जिससे सूरज के किनारों पर एक चमकदार रिंग दिखाई देती है। इसे ही वैज्ञानिक भाषा में ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है।
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समय और विजिबिलिटी का गणित
17 फरवरी को होने वाला यह ग्रहण भारतीय समयानुसार दोपहर 3 बजकर 26 मिनट पर शुरू होगा और शाम 5 बजकर 42 मिनट पर अपने चरम (पीक) पर पहुंचेगा। रिपोर्ट के अनुसार, इस ‘रिंग ऑफ फायर’ का मुख्य रास्ता केवल अंटार्कटिका के ऊपर से गुजरेगा। यही कारण है कि यह भारत में दिखाई नहीं देगा। हालांकि, अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों, अटलांटिक और हिंद महासागर के इलाकों में इसे आंशिक रूप से देखा जा सकेगा।
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भारत में कैसे देख पाएंगे?
चूंकि यह ग्रहण भारत की भौगोलिक स्थिति से बाहर है, इसलिए भारतीय इसे सीधे आसमान में नहीं देख सकेंगे। लेकिन एस्ट्रोनॉमी के शौकीनों के लिए डिजिटल विकल्प मौजूद हैं। नासा (NASA) और वर्चुअल स्पेस टेलीस्कोप जैसी एजेंसियां अपनी आधिकारिक वेबसाइट और यूट्यूब चैनल पर इसका सीधा प्रसारण करेंगी। वैज्ञानिकों के लिए यह ग्रहण विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इसका पीक फेज केवल 1 मिनट और 52 सेकंड तक ही रहेगा।
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बता दें कि इसके बाद 12 अगस्त 2026 को होने वाला पूर्ण सूर्य ग्रहण भी भारत से दिखाई नहीं देगा, लेकिन वैश्विक स्तर पर यह एक बड़ी घटना होगी।

