Health News: ठंड का मौसम आते ही त्वचा का रूखापन बढ़ जाता है और नमी कम होने लगती है। ऐसे में आयुर्वेद एक सरल लेकिन अत्यंत प्रभावी समाधान बताता है: स्नान से पहले तिल के तेल से मालिश। आयुर्वेद में इस प्राचीन क्रिया को ‘अभ्यंग’ कहा जाता है, जिसे भारत सरकार का आयुष मंत्रालय भी दिनचर्या में शामिल करने की सलाह देता है।

आयुर्वेद के विशेषज्ञ बताते हैं कि तिल का तेल ‘स्नेहन’ के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। स्नान से पहले शरीर पर हल्के हाथों से इसकी मालिश करने से त्वचा की नमी बनी रहती है, रूखापन दूर होता है और ठंडी हवा से होने वाली समस्याओं से राहत मिलती है। यह क्रिया न केवल शरीर को तरोताजा रखती है, बल्कि मन को शांति भी प्रदान करती है।

एंटीऑक्सीडेंट्स का पावर हाउस: वात दोष को करता है संतुलित

विशेषज्ञों के अनुसार, तिल का तेल एंटीऑक्सीडेंट्स, विटामिन ई और आवश्यक फैटी एसिड से भरपूर होता है। हल्की मालिश से यह तेल त्वचा में गहराई तक प्रवेश करता है, जिससे रक्त प्रवाह बढ़ता है और मांसपेशियां मजबूत होती हैं।

सर्दियों में नियमित रूप से 10-15 मिनट की यह मालिश जोड़ों का दर्द, थकान और तनाव को कम करती है, साथ ही इम्यूनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) को भी बढ़ाती है। यह तेल शरीर में वात दोष को संतुलित रखने में विशेष रूप से सहायक है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि तेल को हल्का गुनगुना करके, सर्कुलर मोशन में मालिश करनी चाहिए। मालिश के बाद गुनगुने पानी से स्नान करने पर तेल के गुण शरीर में बेहतर तरीके से अवशोषित होते हैं, जिससे त्वचा मुलायम और चमकदार बनती है।

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