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रांंची: फाइलेरिया जैसी विकलांगता पैदा करने वाली बीमारी को जड़ से मिटाने के लिए रांंची जिला प्रशासन अब ‘एक्शन मोड’ में है। शनिवार को उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देश पर उप विकास आयुक्त (DDC) सौरभ कुमार भुवानिया ने एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक का मुख्य एजेंडा मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (MDA) 2026 के तहत शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करना रहा।
लापरवाही बर्दाश्त नहीं
डी़डी़सी ने उन दवा प्रशासकों को कड़ा संदेश दिया है जो वितरण कार्य में सुस्ती बरत रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि ससमय दवा वितरण सुनिश्चित न करने वालों को शो-कॉज (कारण बताओ नोटिस) जारी किया जाए।
कांके, सोनाहातू और तमाड़ पर विशेष नजर
आंकड़ों के अनुसार, अब तक जिले में कुल 88% लोगों ने दवा का सेवन किया है, जिसमें तमाड़ (93%) सबसे आगे और कांके (84%) सबसे पीछे है। डीडीसी ने कांके के प्रखंड विकास पदाधिकारी और चिकित्सा पदाधिकारी को निर्देश दिया कि 15 मार्च 2026 तक छूटे हुए सभी लोगों को दवा खिलाना सुनिश्चित करें।
घर-घर पहुंचेगी टीम
त्योहारों के दौरान बाहर से आने वाले लोगों और स्कूलों में छूटे हुए छात्रों के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि फाइलेरिया रोधी दवा पूरी तरह सुरक्षित है और इसके सेवन से ही हम ‘फाइलेरिया मुक्त भारत’ का सपना सच कर सकते हैं।

