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Ranchi News : झारखंड राज्य के निर्माता, सामाजिक समरसता और आदिवासी अस्मिता के प्रतीक पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद दिशोम गुरु वीर शिबू सोरेन को मुस्लिम समाज ने भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर शाह रेसिडेंसी होटल, कर्बला चौक में एक विशेष ‘ख़िराज-ए-अक़ीदत सह परिचर्चा’ का आयोजन किया गया, जिसमें समाज के प्रबुद्धजन, धर्मगुरु, आंदोलनकारी और सामाजिक कार्यकर्ता बड़ी संख्या में शामिल हुए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता मौलाना डॉ. ओबैदुल्लाह क़ासमी ने की, जबकि संचालन ‘लहू बोलेगा’ के नदीम खान ने किया। विषय प्रवेश झारखंड आंदोलनकारी और वक्फ बोर्ड के सदस्य मो. फै़ज़ी ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत शहर काज़ी कारी जान मोहम्मद मुस्तफी द्वारा क़ुरआन की तिलावत से हुई। होटल के शाह उमैर ने सभी मेहमानों का स्वागत किया और समाजसेवी मो. बब्बर ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
वक्ताओं ने वीर शिबू सोरेन को सामाजिक सौहार्द का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि “जोल्हा-कोल्हा भाई-भाई” का नारा झारखंडी संस्कृति में सामाजिक समरसता का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसे दिशोम गुरु ने जीवन में उतारा। गुरुजी ने न केवल आदिवासियों के लिए बल्कि मुस्लिम समाज समेत सभी वंचित तबकों की आवाज़ को मजबूती दी। कई मुस्लिम नेताओं को उन्होंने अपने आंदोलन, संगठन और सत्ता में नेतृत्व के अवसर दिए।
कार्यक्रम में तीन महत्त्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए
- मुस्लिम समाज के प्रतिनिधि शनिवार को दिशोम गुरु के पैतृक गांव नेमरा जाकर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
- वीर गुरु की स्मृति में ‘रक्तदान-महादान शिविर’ का आयोजन किया जाएगा।
- दिशोम गुरु को ‘भारत रत्न’ से सम्मानित करने की माँग की गई।
मुख्य वक्ता मौलाना क़ासमी ने कहा कि “शिबू सोरेन एक नेता नहीं, एक आंदोलन थे। उन्होंने अंतिम सांस तक इंसाफ़ और समानता के लिए संघर्ष किया।”
मो. फैज़ी ने झारखंड आंदोलन के दौरान गुरुजी के नेतृत्व को याद करते हुए कहा, “गुरुजी की दूरदृष्टि और हिम्मत ने हमें अलग राज्य का सपना दिया जो सच हुआ, लेकिन आज वह सपना देखने वाला हमारे बीच नहीं है।”
कार्यक्रम में शहर काज़ी मौलाना अंसारुल्लाह क़ासमी, काज़ी उज़ैर,मुफ़्ती नसरुद्दीन मज़ाहरी, शहर काज़ी कारी जान मोहम्मद मुस्तफी, मौलाना मेराज़ अशरफ़, मुफ़्ती अब्दुल हासिब, मुफ़्ती ताल्हा नदवी सहित झारखंड आंदोलनकारी मो ज़ुबैर, एजाज़ अनवर, मो फ़ैज़ी, प्रोफेसर इलियास माजिदी, मुजीब कुरैशी सहित ख़ालिद ख़लील, प्रोफेसर महमूद आलम, प्रोफेसर डॉ अशरफ़ हुसैन, अधिवक्ता अज़हर खान, जेएमएम नेता आफ़ताब आलम, तनवीर अहमद, इम्तियाज अहमद, जावेद कुरैशी, साज़िद उमर, शाहनवाज़ अब्बास, अकरम राशिद, पत्रकार बुलंद अख़्तर, मो लतीफ़ अंसारी, जावेद अहमद, शम्स तबरेज़ आदि शामिल थे।
इस आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया कि शिबू सोरेन केवल आदिवासी समाज के नेता नहीं थे, बल्कि वे पूरे झारखंड और सभी वंचित समाज के साझा नेता थे। मुस्लिम समाज द्वारा उन्हें दी गई यह श्रद्धांजलि आने वाली पीढ़ियों को सामाजिक एकता और संघर्ष की प्रेरणा देती रहेगी।

