New Delhi: लोकतंत्र के मंदिर यानी संसद भवन परिसर से आज दो ऐसी तस्वीरें सामने आईं, जिन्होंने सोशल मीडिया से लेकर गलियारों तक हलचल मचा दी। पहली तस्वीर ‘दोस्ती और संवेदनशीलता’ की थी, जहां कांग्रेस सांसद शशि थरूर सीढ़ियों पर फोन पर बात करते हुए अचानक लड़खड़ा गए। गनीमत रही कि पास ही समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव खड़े थे। जैसे ही थरूर फिसले, अखिलेश ने बिजली की फुर्ती से उन्हें संभाल लिया और हाथ पकड़कर सीढ़ियों से नीचे उतारा।
शशि थरूर का शायराना जवाब
Thank you @yadavakhilesh-ji! Your prompt, helpful hand, and concern for Dr @ShashiTharoor are heartwarming!pic.twitter.com/NAF69W9E8k
— Bharat Tiwari (@BharatTiwari) February 4, 2026
इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद जब शुभचिंतकों ने चिंता जताई, तो शशि थरूर ने अपने चिर-परिचित अंदाज में एक्स (ट्विटर) पर एक मशहूर शेर साझा किया। उन्होंने लिखा— “जिस दीए को तूफां में जलना होगा, उसे संभल-संभल के चलना होगा। मैं ठीक हूं।” हालांकि, उनके इस पोस्ट के अब सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं कि क्या यह ‘तूफां’ आगामी चुनावों या संसद की अंदरूनी राजनीति की ओर इशारा है।
राहुल और बिट्टू के बीच ‘गद्दार’ पर छिड़ी जंग
वहीं, दूसरी ओर संसद परिसर में ही राजनीति का एक कड़वा चेहरा देखने को मिला। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के बीच जबरदस्त नोकझोंक हुई। खबरों के मुताबिक, राहुल गांधी ने बिट्टू को ‘गद्दार’ कह दिया। हालांकि राहुल ने हाथ मिलाने के लिए आगे बढ़ाया था, लेकिन बिट्टू बिना हाथ मिलाए तमतमाते हुए निकल गए।
सिख अस्मिता पर छिड़ा विवाद
इस बयान के बाद भाजपा ने राहुल गांधी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दिल्ली के सभी सात भाजपा सांसदों ने इसे सिख समुदाय का अपमान बताते हुए निंदनीय करार दिया है। भाजपा का कहना है कि एक शहीद परिवार से आने वाले मंत्री के लिए ‘गद्दार’ शब्द का प्रयोग करना राहुल गांधी की मानसिकता को दर्शाता है। एक तरफ शिष्टाचार की मिसाल और दूसरी तरफ तीखी बयानबाजी ने आज संसद के माहौल को पूरी तरह गरमाए रखा।



