India News: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर की गई एक सोशल मीडिया टिप्पणी के बाद गिरफ्तार की गई लॉ छात्रा शर्मिष्ठा पानोली को हिरासत में बलात्कार और हत्या की धमकियों का सामना करना पड़ा है।

NHRC ने बंगाल सरकार से मांगी रिपोर्ट

इस गंभीर मामले में अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने पश्चिम बंगाल सरकार से जवाब मांगा है। आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को 10 दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।

गौरतलब है कि पुणे के लॉ कॉलेज में पढ़ने वाली शर्मिष्ठा को कोलकाता पुलिस ने गुरुग्राम से 30 मई को गिरफ्तार किया था। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के संदर्भ में एक समुदाय विशेष की चुप्पी पर सवाल उठाए थे, जिसे कथित तौर पर सांप्रदायिक बताया गया। हालांकि शर्मिष्ठा ने पोस्ट डिलीट करने के साथ माफी भी मांग ली थी, फिर भी उनके खिलाफ IPC की धारा 299 के तहत मामला दर्ज कर उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

इस बीच, लीगल राइट्स ऑब्जर्वेटरी (LRO) नामक संस्था ने NHRC में शिकायत दर्ज करवाई कि शर्मिष्ठा को हिरासत में कट्टरपंथी तत्वों से बलात्कार और जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया है कि गिरफ्तारी प्रक्रिया में कानूनी प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया। NHRC के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने पुष्टि की है कि आयोग ने इस शिकायत को गंभीरता से लिया है और बंगाल व हरियाणा सरकार दोनों से रिपोर्ट मांगी है।

NHRC ने यह भी निर्देश दिया है कि शर्मिष्ठा की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि हिरासत में उनके साथ कोई अनहोनी न हो।

इस मामले में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) और बार काउंसिल ऑफ दिल्ली ने भी कोलकाता पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। BCI के अध्यक्ष ने कहा, “शर्मिष्ठा पानोली ने अपनी पोस्ट को हटाने और माफी मांगने के बावजूद गिरफ्तारी झेली है, यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है।” वहीं बार काउंसिल ऑफ दिल्ली ने इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित और चयनात्मक कार्रवाई करार दिया है।

इस घटनाक्रम से कोलकाता पुलिस की भूमिका पर सवाल उठे हैं, खासकर तब, जब शिकायतकर्ता वजाहत खान खुद विवादित पोस्टों के लिए पहले से आरोपों का सामना कर रहे हैं।

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