Tips & Tricks: स्कूल को बच्चों के लिए सबसे सुरक्षित स्थान माना जाता है, लेकिन हालिया घटनाओं ने इस भरोसे को हिलाकर रख दिया है। आज के समय में स्कूल बस में बैठने से लेकर वापस घर लौटने तक, बच्चों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बन गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को ट्रैक करना और स्कूल के माहौल पर नजर रखना अब अभिभावकों की अनिवार्य जिम्मेदारी है।

ट्रांसपोर्ट सुरक्षा: ड्राइवर और कंडक्टर से रहें संपर्क में

बच्चों को स्कूल बस या वैन में भेजते समय ड्राइवर और कंडक्टर का मोबाइल नंबर हमेशा अपने पास रखें। बच्चे के स्कूल पहुंचने तक उनके संपर्क में रहें। यदि संभव हो, तो स्मार्टफोन के जरिए वीडियो कॉल कर बच्चे से बात करें। आज के दौर में कई ऐसे ट्रैकिंग एप्लीकेशन मौजूद हैं, जिनसे आप घर बैठे बस की लोकेशन देख सकते हैं। स्कूल पहुंचते ही क्लास टीचर या अटेंडेंट से बच्चे के सुरक्षित पहुंचने की पुष्टि जरूर करें।

स्कूल कैंपस की जांच: कैमरों और बाथरूम पर नजर

एडमिशन के समय ही यह सुनिश्चित करें कि स्कूल के हर कोने—क्लास, हॉल, लॉबी और गार्डन एरिया में वर्किंग सीसीटीवी कैमरे लगे हों। यह भी पता करें कि क्या आप इन कैमरों से ऑनलाइन कनेक्ट हो सकते हैं। इसके अलावा:

  • बाथरूम की सुरक्षा: यह देखें कि टॉयलेट एरिया के पास महिला अटेंडेंट तैनात है या नहीं।

  • बड़ों का प्रवेश: सुनिश्चित करें कि बच्चों के टॉयलेट का इस्तेमाल स्कूल का अन्य स्टाफ या बड़े लोग न करें।

स्टाफ का वेरिफिकेशन और मानसिक जांच

स्कूल में तैनात गार्ड्स, टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ का पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य रूप से होना चाहिए। इसके साथ ही स्टाफ की मानसिक स्थिति (Mental Health) की समय-समय पर जांच होनी चाहिए ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

बच्चों से संवाद है सबसे बड़ा हथियार

अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों को स्कूल में अकेले कहीं भी न जाने की सलाह दें। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि बच्चा स्कूल के बारे में कोई छोटी सी भी शिकायत या बात बताता है, तो उसे नजरअंदाज न करें। बच्चे की बात को गंभीरता से सुनें और तुरंत स्कूल प्रबंधन से इस बारे में स्पष्ट बात करें।

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