Gumla news: बसंत पंचमी के पावन अवसर पर गुमला जिले के डुमरी प्रखंड अंतर्गत अकासी गांव में स्थित पवित्र सिरसी-ता-नाला (ककड़ो लाता) सरना स्थल पर सरना धर्म आध्यात्मिक महासमागम का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम झारखंड सरकार के पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग के तत्वावधान में जिला प्रशासन गुमला द्वारा आयोजित किया गया।

दीप प्रज्वलन से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसके बाद सामूहिक पूजा-अर्चना, धार्मिक अनुष्ठान और भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। पूरे क्षेत्र में श्रद्धा, आस्था और भक्ति का माहौल देखने को मिला। दूर-दराज के इलाकों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु सरना धर्म महासमागम में शामिल हुए।

मंत्री चमरा लिंडा ने बताया सरना धर्म का मर्म

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि झारखंड सरकार के मंत्री चमरा लिंडा ने अपने संबोधन में कहा कि सरना धर्म केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि प्रकृति आधारित जीवन दर्शन है। यह धर्म मानव को नैतिकता, अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व का मार्ग दिखाता है।
उन्होंने कहा कि सरना समाज के पास लिखित धर्मग्रंथ नहीं हैं, लेकिन कथा, गीत, परंपरा, पूजा-पाठ और कहावतें ही पीढ़ी दर पीढ़ी धर्म और संस्कृति को जीवित रखे हुए हैं।

सिरसी-ता-नाला को बताया आस्था का केंद्र

मंत्री ने कहा कि सिरसी-ता-नाला सरना स्थल को सृष्टि की उत्पत्ति से जोड़ा जाता है, इसी कारण यह स्थल आदिवासी समाज के लिए अत्यंत पवित्र है। उन्होंने श्रद्धालुओं से धर्मेश कंडों के पवित्र जल को घर ले जाकर अपने जीवन में धर्म और संस्कारों को आत्मसात करने की अपील की।

नशाखोरी और कुरीतियों पर जताई चिंता

चमरा लिंडा ने समाज में बढ़ती नशाखोरी और डायन प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि नशा समाज को कमजोर करता है और धर्म तथा नैतिक मूल्यों से दूर ले जाता है।
उन्होंने सरना धर्म को विधिवत पहचान दिलाने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि आगामी जनगणना से पहले आदिवासी समाज को संगठित और जागरूक होना होगा।

जल-जंगल-जमीन की रक्षा पर दिया जोर

मंत्री ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा को सरना धर्म का मूल संदेश बताया। उन्होंने सिरसी-ता-नाला पवित्र स्थल के संरक्षण, सीमांकन और आपसी समन्वय से भूमि विवाद सुलझाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

विधायक और प्रशासनिक अधिकारियों के विचार

कार्यक्रम में सिसई विधायक जिग्गा सुसारन होरो और खूंटी विधायक राम सूर्य मुंडा विशेष रूप से मौजूद रहे।
राम सूर्य मुंडा ने कहा कि यह सरना स्थल वर्षों से श्रद्धा का केंद्र रहा है, जहां धार्मिक आयोजनों के साथ सांस्कृतिक नृत्य और गीत समाज को जोड़ते हैं।
जिग्गा सुसारन होरो ने युवाओं से शिक्षा को अपनाने और अपनी संस्कृति को सशक्त बनाने का आह्वान किया।

प्रशासन ने दिया संरक्षण का भरोसा

उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित ने कहा कि सरना धर्म मानव और प्रकृति के सह-अस्तित्व का सशक्त उदाहरण है। उन्होंने माताओं से बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की अपील की और कहा कि जिला प्रशासन भाषा, संस्कृति और पहचान के संरक्षण के लिए समाज के साथ खड़ा है।

कार्यक्रम शांतिपूर्ण, अनुशासित और श्रद्धामय वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। मौके पर अपर समाहर्ता गुमला, अनुमंडल पदाधिकारी चैनपुर, जिला खेल पदाधिकारी, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी, बीडीओ डुमरी सहित कई पदाधिकारी और कर्मी उपस्थित रहे।

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