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रांची: राजधानी में प्रकृति पर्व ‘सरहुल’ की गूँज सुनाई देने लगी है। आदिवासी संस्कृति के इस सबसे बड़े उत्सव को शांतिपूर्ण और भव्य तरीके से संपन्न कराने के लिए रांची जिला प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में है। रविवार, 15 मार्च 2026 को उपायुक्त (DC) मंजूनाथ भजन्त्री और वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) राकेश रंजन ने स्वयं सड़कों पर उतरकर तैयारियों का जायजा लिया।
सिरम टोली और हातमा का दौरा
दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने शहर के प्रमुख आस्था केंद्रों सिरम टोली और हातमा सरना स्थल का संयुक्त निरीक्षण किया। अधिकारियों ने न केवल व्यवस्थाएं देखीं, बल्कि सरना समितियों के प्रतिनिधियों के साथ जमीन पर बैठकर उनकी समस्याओं और सुझावों को भी सुना।
निरीक्षण के दौरान DC मंजूनाथ भजन्त्री ने स्पष्ट कहा, “सरहुल सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि झारखंड की समृद्ध आदिवासी विरासत का प्रतीक है। हमारी कोशिश है कि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना में कोई असुविधा न हो।”
सुविधाओं की लंबी फेहरिस्त
प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मास्टर प्लान तैयार किया है:
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साफ-सफाई और लाइटिंग: सड़कों के समतलीकरण और दूधिया रोशनी से सरना स्थलों को जगमग करने के निर्देश दिए गए हैं।
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बुनियादी जरूरतें: भीषण गर्मी को देखते हुए पर्याप्त पेयजल, मोबाइल टॉयलेट और चिकित्सा सहायता स्टॉल लगाए जाएंगे।
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भीड़ नियंत्रण: श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन के लिए बैरिकेडिंग और पार्किंग की विशेष व्यवस्था होगी।
ड्रोन और CCTV से निगरानी
सुरक्षा के मोर्चे पर SSP राकेश रंजन ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने बताया कि इस बार सुरक्षा व्यवस्था में तकनीक का भरपूर इस्तेमाल होगा:
ड्रोन और CCTV: जुलूस के रास्तों और मुख्य स्थलों पर तीसरी आंख (CCTV) और आसमान से ड्रोन के जरिए निगरानी रखी जाएगी।
ट्रैफिक प्लान: आम जनता को परेशानी न हो, इसके लिए जल्द ही ‘ट्रैफिक डायवर्जन चार्ट’ जारी किया जाएगा।
अतिरिक्त बल: संवेदनशील इलाकों में भारी संख्या में पुलिस बल और सादे लिबास में जवान तैनात रहेंगे।
निरीक्षण के दौरान ग्रामीण एसपी प्रवीण पुष्कर, सदर एसडीओ कुमार रजत और अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। प्रशासन ने शहरवासियों से अपील की है कि वे आपसी भाईचारे और अनुशासन के साथ इस पावन पर्व को मनाएं।

