Patna: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने महिला आरक्षण विधेयक के मुद्दे पर विपक्षी दलों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। रविवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि विपक्षी पार्टियों ने नारी शक्ति के आरक्षण का अपमान किया है, जो सीधे तौर पर महिलाओं के साथ धोखा है। मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर कांग्रेस, टीएमसी और समाजवादी पार्टी की खुशी को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
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राहुल गांधी पर तीखा कटाक्ष करते हुए सम्राट चौधरी ने कहा कि उनकी बहन तो सांसद बन सकती हैं, लेकिन अन्य साधारण महिलाओं को अवसर देने की बात आती है तो कांग्रेस की मंशा संदिग्ध हो जाती है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वर्तमान में बिहार विधानसभा में केवल 29 महिला विधायक हैं, जबकि आरक्षण लागू होने पर यह संख्या 122 तक पहुंच सकती थी। उन्होंने इसे राजनीतिक भागीदारी का अहम मौका बताया जिसे विपक्ष ने छीन लिया।
मुख्यमंत्री ने बिहार के पंचायत मॉडल का जिक्र करते हुए कहा कि 50 प्रतिशत आरक्षण के बावजूद राज्य में करीब 59 प्रतिशत महिलाएं चुनाव जीतकर आ रही हैं। यह नारी शक्ति की क्षमता का प्रमाण है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल केवल परिवारवाद तक सीमित हैं और उन्होंने अपने लंबे शासनकाल में कभी महिलाओं, दलितों या आदिवासियों के हितों की चिंता नहीं की।
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उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) इस मुद्दे पर एकजुट है और महिला आरक्षण का विरोध करने वालों को बेनकाब किया जाएगा। गौरतलब है कि 17 अप्रैल को लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत न मिल पाने के कारण यह विधेयक पारित नहीं हो सका था, जिसे लेकर अब बिहार की सियासत गरमा गई है।
नारी शक्ति के लिए प्रतिबद्धता और चुनौती: सम्राट चौधरी
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का कहना है कि उनकी सरकार महिलाओं को उनका हक दिलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने विपक्षी दलों को चुनौती देते हुए कहा कि जो दल आज इस बिल के गिरने पर जश्न मना रहे हैं, उन्हें जनता और विशेषकर महिलाएं आने वाले समय में कड़ा जवाब देंगी। उन्होंने दोहराया कि जब तक महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल जाता, भाजपा का संघर्ष जारी रहेगा।



