Ranchi :शिक्षकों और जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE) बादल राज के बीच तनातनी तेज हो गई है। 8 सितंबर को अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ, रांची इकाईके आह्वान पर जिले भर के प्राथमिक और मध्य विद्यालय के शिक्षकों ने अपने-अपने स्कूलों में काला बिल्ला लगाकर शिक्षण कार्य किया। यह विरोध प्रदर्शन DSE द्वारा जारी उस आदेश के खिलाफ था, जिसमें वार्षिक वेतन वृद्धि पाने के लिए शिक्षकों को हिंदी टिप्पण परीक्षा और प्रारूपण परीक्षासे संबंधित शपथ पत्र प्रथम श्रेणी दंडाधिकारी के समक्ष जमा करने का निर्देश दिया गया है।
संघ के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह आदेश पूरी तरह से अव्यावहारिक है। उनका कहना है कि शिक्षक पहले से ही हिंदी टिप्पण परीक्षा से मुक्त किए जा चुके हैं, ऐसे में इस आधार पर वार्षिक वेतन वृद्धि रोकना नियमों के खिलाफ है। जिले के लगभग तीन हजार शिक्षकों का जुलाई माह से वेतन वृद्धि रोक दिया गया है, जबकि राज्य के 23 अन्य जिलों में यह लाभ समय पर दे दिया गया।
संघ के अध्यक्ष अनूप केशरी, मुख्य प्रवक्ता नसीम अहमद और जिला अध्यक्ष सलीम सहाय ने कहा कि रांची DSE का यह कदम न केवल नियमों से परे है बल्कि शिक्षकों को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने वाला भी है। उन्होंने आरोप लगाया कि DSE की कार्यशैली तानाशाही जैसी है, जिसके कारण शिक्षक मजिस्ट्रेट कार्यालय का चक्कर लगाने को मजबूर हो रहे हैं।
संघ के नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही शिक्षकों की वार्षिक वेतन वृद्धि बहाल नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जब पूरे राज्य में एक समान नियम लागू है तो राजधानी रांची के शिक्षक क्यों अलग परिस्थितियों में धकेले जा रहे हैं?यह प्रश्न शिक्षकों में गहरी नाराजगी पैदा कर रहा है।
आज के विरोध कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल हुए और अपनी एकजुटता का परिचय दिया। इनमें बिजेंद्र चौबे, राकेश कुमार, अजय ज्ञानी, संतोष कुमार, सतीश बड़ाइक, विमलेश मिश्रा, मनोज पांडे, अरविंद कुमार, अफसरुद्दीन, रंजीत मोहन, मदन महतो, योगेंद्र कुमार, जुबैर आलम, शिवनाथ टोप्पो, अमन बड़ा, कंचन लता, सुमन कुमारी, मोमिता, आभा कुमार, सुषमा इक्का, संतोष तिवारी, विजय मुंडा, शमीम अंसारी सहित सैकड़ों शिक्षक शामिल रहे।
अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ ने स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन DSE की कार्यशैली में बदलाव लाने और शिक्षकों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ जारी रहेगा।