मुंगेर | रिपोर्टर

बिहार की राजनीति में इन दिनों एक नाम की चर्चा सबसे ज्यादा है, और वह नाम है सकलदेव बिंद। यह कहानी केवल एक नेता के सत्ता के करीब पहुंचने की नहीं है, बल्कि राजनीति में वादे, वफादारी और अपमान से सम्मान तक के सफर की एक जीवंत मिसाल है। सकलदेव बिंद, जो कभी महागठबंधन की राजनीति में उपेक्षा का शिकार हुए थे, आज बिहार के मुख्यमंत्री आवास में पूरे प्रोटोकॉल और सम्मान के साथ दाखिल होते हैं। उनकी यह यात्रा दर्शाती है कि राजनीति शतरंज के उस खेल की तरह है, जहां धैर्य और सही रणनीतिक फैसला कभी भी बाजी पलट सकता है।

सकलदेव बिंद कभी मुकेश सहनी की वीआईपी (VIP) पार्टी के सबसे भरोसेमंद रणनीतिकारों में शुमार थे। उनकी तकदीर में मोड़ तब आया जब विधानसभा चुनाव के दौरान उन्हें तारापुर सीट से महागठबंधन का प्रत्याशी घोषित किया गया। जोश के साथ उन्होंने नामांकन भी भरा, लेकिन रातों-रात समीकरण बदल गए। आरजेडी ने अचानक अपने पुराने चेहरे अरुण साह को मैदान में उतारकर सकलदेव का टिकट काट दिया। अतिपिछड़ा समाज से आने वाले सकलदेव के लिए यह केवल एक टिकट का जाना नहीं, बल्कि गहरा राजनीतिक आघात और अपमान था।

अपमानित महसूस कर रहे सकलदेव ने निर्दलीय हुंकार भरी, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय होने वाला था। तभी सम्राट चौधरी ने हस्तक्षेप किया। सम्राट चौधरी की मध्यस्थता और उनके द्वारा किए गए सार्वजनिक वादे के बाद सकलदेव ने न केवल नाम वापस लिया, बल्कि मंच साझा कर अपनी वफादारी साबित की। वक्त ने करवट ली और सम्राट चौधरी आज बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं। अपने वादे को निभाते हुए सम्राट चौधरी ने सकलदेव को वह सम्मान दिया, जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी।

सकलदेव आज भावुक होकर कहते हैं कि जिस अतिपिछड़ा के बेटे के साथ महागठबंधन ने विश्वासघात किया था, आज उसे मुख्यमंत्री के ठीक बगल में जगह मिली है। वे गर्व से बताते हैं कि जिस मुख्यमंत्री आवास को उन्होंने कभी अंदर से देखा तक नहीं था, वहां आज उन्हें सम्मान के साथ भीतर बुलाया जाता है। आज उनका कद केवल तारापुर ही नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में भी बढ़ गया है। सम्राट चौधरी के विश्वासपात्रों में शामिल होकर सकलदेव ने साबित कर दिया है कि राजनीति में धोखे का जवाब यदि धैर्य और सही गठबंधन से दिया जाए, तो तकदीर बदलते देर नहीं लगती।

धोखे से सम्मान तक का सफर: सकलदेव बिंद

सकलदेव बिंद की कहानी बिहार के राजनीतिक गलियारों में एक मिसाल बन गई है। उनके करीबी बताते हैं कि तारापुर के चुनावी संघर्ष के दौरान जो दरार पैदा हुई थी, उसे सम्राट चौधरी ने अपने राजनीतिक कौशल से न केवल भरा, बल्कि एक नए नेतृत्व को जन्म दिया। आज सकलदेव बिहार के नए राजनीतिक समीकरणों के एक अहम गवाह हैं, जिनका सफर विश्वासघात की कड़वाहट से शुरू होकर मुख्यमंत्री आवास के सम्मान तक पहुंच गया है।

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