रांची: झारखंड की सियासत में ‘ट्रेजरी घोटाले’ ने एक नया भूचाल ला दिया है। भारतीय जनता पार्टी ने बोकारो और हजारीबाग ट्रेजरी मामले को लेकर हेमंत सरकार की घेराबंदी तेज कर दी है। प्रदेश कार्यालय में आयोजित एक तीखी प्रेस वार्ता में भाजपा प्रवक्ता अजय साह ने आरोप लगाया कि अगर इस महाघोटाले की निष्पक्ष जांच हुई, तो कई रसूखदार ‘सफेदपोश’ और बड़े पुलिस अधिकारी सलाखों के पीछे होंगे।
एक लेखपाल अकेले नहीं लूट सकता करोड़ों
अजय साह ने बोकारो में गिरफ्तार कौशल पांडे का हवाला देते हुए कहा कि जो व्यक्ति पूर्व डीजीपी से सम्मानित हो चुका हो और बड़े पुलिस अफसरों का करीबी रहा हो, वह बिना संरक्षण के इतना बड़ा खेल नहीं कर सकता। भाजपा का तर्क है कि 25 महीनों के भीतर 63 बार अवैध निकासी करना किसी एक व्यक्ति के बस की बात नहीं है। यह एक सुव्यवस्थित और संगठित रैकेट है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब जिला स्तर पर एसपी और डीएपी की जिम्मेदारी होती है, तो उनकी नाक के नीचे 20 करोड़ रुपये कैसे निकाल लिए गए? भाजपा ने मांग की है कि इस मामले में संबंधित एसपी और डीएपी की भूमिका की भी गहन जांच होनी चाहिए।
चारा घोटाले से भी बड़ी लूट की आशंका
भाजपा प्रवक्ता ने आशंका जताई कि अभी तो सिर्फ दो जिलों (बोकारो और हजारीबाग) की परतें खुली हैं, जहाँ लगभग 20 करोड़ का गबन सामने आया है। यदि पूरे झारखंड के सभी जिलों की ट्रेजरी फाइलों को खंगाला जाए, तो यह आंकड़ा राज्य के चर्चित ‘चारा घोटाले’ के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ सकता है। पार्टी का कहना है कि जिस घोटाले में पुलिस महकमे के लोग ही संदेह के घेरे में हों, उसकी जांच पुलिस से कराना कतई उचित नहीं है। इसलिए, पार्टी ने इसकी न्यायिक जांच या सीबीआई जांच की पुरजोर मांग की है।
घोटालों की लंबी फेहरिस्त और कैग की रिपोर्ट
प्रेस वार्ता के दौरान भाजपा ने हेमंत सरकार के पिछले ट्रैक रिकॉर्ड पर भी प्रहार किया। अजय साह ने याद दिलाया कि ऊर्जा विभाग में 100 करोड़, पेयजल विभाग में 23 करोड़ और पर्यटन विभाग में 10 करोड़ की अवैध निकासी के मामले पहले ही सामने आ चुके हैं। भाजपा का आरोप है कि सरकार जानबूझकर डीएमएफटी (DMFT) और शराब घोटाले से जुड़ी फाइलें कैग (CAG) को नहीं सौंप रही है। अगर ये फाइलें सामने आईं, तो हजारों करोड़ के भ्रष्टाचार का पर्दाफाश होना तय है। अब देखना यह है कि विपक्ष के इन गंभीर आरोपों पर सरकार क्या रुख अपनाती है।



