India News: ओडिशा के पुरी में विश्वप्रसिद्ध जगन्नाथ रथयात्रा शुक्रवार को भारी भीड़ के साथ शुरू हुई, जिसमें लगभग 10 लाख श्रद्धालु शामिल हुए। यह भीड़ हर साल की तुलना में डेढ़ गुना अधिक थी, जिसके चलते रथ मार्ग पर स्थिति नियंत्रण से बाहर होती नजर आई।

तीनों रथों—बलभद्र, सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ के विशाल रथों को आगे बढ़ाने में भारी मशक्कत करनी पड़ी। सबसे आगे बलभद्र का रथ लगभग आधे रास्ते तक पहुंच सका, जबकि देवी सुभद्रा का रथ केवल 750 मीटर खिसका। वहीं भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष रथ मंदिर के बाहर ही अटका रहा और मात्र 1 मीटर ही आगे बढ़ सका।

शाम होते-होते देवी सुभद्रा के रथ के आसपास भीड़ इतनी अधिक हो गई कि अफरातफरी मच गई। इस अफरा-तफरी में 600 से ज्यादा श्रद्धालु की तबीयत बिगड़ गई। कई बेहोश हो गए तो कुछ को मामूली चोटें भी आईं। पुरी मेडिकल कॉलेज एवं जिला अस्पताल में इनका इलाज चल रहा है, जिनमें 9 की हालत गंभीर बताई जा रही है।

प्रशासन ने रात 8 बजे तीनों रथों की यात्रा रोकने का फैसला लिया और अब शनिवार को यात्रा फिर से शुरू की जाएगी।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रथ यात्रा मार्ग में आने वाले एक मोड़ पर रथ खींचने में काफी कठिनाई आई। इससे जुलूस की रफ्तार धीमी हो गई और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उस क्षेत्र में इकट्ठा हो गए। कई श्रद्धालु प्रतिबंधित क्षेत्र में भी घुस गए, जिससे रथों की सुचारू आवाजाही में और बाधा उत्पन्न हुई।

सुरक्षा एजेंसियों ने बताया कि उम्मीद से कहीं ज्यादा भीड़ पहुंचने के कारण सुरक्षा और व्यवस्था दोनों पर दबाव बढ़ गया। इस असमंजस और अव्यवस्था के कारण कई श्रद्धालुओं को तत्काल चिकित्सकीय सहायता की जरूरत पड़ी।

पुरी प्रशासन अब अगले चरण की रथयात्रा को बेहतर ढंग से संपन्न कराने की तैयारियों में जुट गया है। वहीं श्रद्धालुओं से अपील की जा रही है कि वे प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और धैर्य बनाए रखें।

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