London, (United Kingdom): प्रकृति की असीम गहराइयों में कितने रहस्य छिपे हैं, इसका एक जीता-जागता प्रमाण हाल ही में देखने को मिला। गहरे समुद्र में मछली पकड़ने गई एक टीम के हाथ एक ऐसा दुर्लभ लॉब्स्टर (Lobster) लगा है, जिसने वैज्ञानिकों और आम जनता दोनों को मंत्रमुग्ध कर दिया है। इस जीव की सबसे खास बात इसका रंग है—यह बिल्कुल बीच से दो हिस्सों में बंटा हुआ दिखता है, जिसका आधा हिस्सा भूरा और आधा हिस्सा चमकीले नारंगी रंग का है।

क्या है इस रंगत का वैज्ञानिक राज?— विशेषज्ञों के अनुसार, यह कोई सामान्य बदलाव नहीं बल्कि एक विशेष जैविक घटना है। इसे जेनेटिक मोज़ेकिज्म या गाइनेंड्रोमॉर्फिज्म कहा जाता है। इसका सरल अर्थ यह है कि इस जीव के शरीर में अलग-अलग आनुवंशिक कोशिकाएं मौजूद हैं। अक्सर ऐसे मामलों में जीव में नर और मादा दोनों के गुण एक साथ पाए जाते हैं, जिसके कारण उसका शरीर दो स्पष्ट रंगों में विभाजित हो जाता है।

खाने के बजाय एक्वेरियम को दान— इस असाधारण खोज के महत्व को देखते हुए कंपनी के अधिकारियों ने इसे भोजन के रूप में इस्तेमाल करने के बजाय संरक्षित करने का साहसी निर्णय लिया। इस दुर्लभ लॉब्स्टर को अब वुड्स होल साइंस एक्वेरियम को दान कर दिया गया है। यहां इसे वैज्ञानिक अध्ययन के लिए रखा जाएगा और जल्द ही आम जनता के दीदार के लिए प्रदर्शित किया जाएगा।

प्रकृति की ‘अदृश्य’ रचनात्मकता— एक्वेरियम की जीवविज्ञानी जूलिया स्टडली ने इस पर खुशी जताते हुए कहा कि यह लॉब्स्टर हमें प्रकृति की जटिलता और विविधता के बारे में बहुत कुछ सिखाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे जीव आनुवंशिकी (Genetics) के रहस्यों को समझने में मील का पत्थर साबित होते हैं। सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें वायरल होने के बाद लोग इसे कुदरत का करिश्मा बता रहे हैं। यह घटना याद दिलाती है कि समुद्र के सीने में आज भी ऐसे कई राज दफन हैं, जिनका सामने आना बाकी है।

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