Chaibasa News: आदिवासी उरांव समाज द्वारा पारंपरिक जतरा पर्व के अवसर पर आयोजित 27वीं जतरा कप क्रिकेट टूर्नामेंट का समापन एसोसिएशन ग्राउंड चाईबासा में हुआ। दो दिवसीय इस प्रतियोगिता में चाईबासा, चक्रधरपुर, जमशेदपुर, गुवा सहित अन्य राज्यों की कुल 24 टीमों ने भाग लिया। प्रतियोगिता में राखा चक्रधरपुर की टीम विजेता बनी, जबकि सरना ब्रदर्स जमशेदपुर की टीम उपविजेता रही।

टूर्नामेंट की खास बात यह रही कि इसमें भाग लेने वाले सभी खिलाड़ी उरांव समाज से जुड़े हुए थे। खिलाड़ियों ने पूरे प्रतियोगिता के दौरान शानदार प्रदर्शन किया। आयोजन समिति की ओर से क्वार्टर फाइनल में हारने वाली एक टीम को लॉटरी के माध्यम से सेमीफाइनल में खेलने का मौका भी दिया गया।

समापन एवं फाइनल मैच के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में झारखंड वैश्य संघर्ष मोर्चा के जिलाध्यक्ष सह समाजसेवी सुनील प्रसाद साव उपस्थित थे। वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में आदिवासी उरांव समाज चाईबासा के अध्यक्ष संचू तिर्की और मुख्य सलाहकार सहदेव किस्पोट्टा मौजूद रहे।

इस मौके पर सुनील प्रसाद साव ने कहा कि आदिवासी उरांव समाज पिछले 26 वर्षों से लगातार इस तरह के टूर्नामेंट का आयोजन करता आ रहा है।

ऐसे आयोजन समाज को एकजुट करने के साथ-साथ युवाओं को खेल के प्रति प्रेरित करते हैं। उन्होंने कहा कि खेल से शारीरिक और मानसिक विकास होता है तथा खिलाड़ियों में अनुशासन और प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित होती है। उन्होंने विजेता और उपविजेता टीम समेत सभी खिलाड़ियों को बधाई दी।

समापन समारोह में बेस्ट बॉलर का पुरस्कार शंकर तिग्गा, मैन ऑफ द मैच का पुरस्कार शिव तिर्की और मैन ऑफ द सीरीज का पुरस्कार सुनील उरांव को दिया गया। इसके अलावा हैट्रिक विकेट और हैट्रिक छक्का लगाने वाले खिलाड़ियों को भी सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के अंत में उरांव समाज खेल एवं सांस्कृतिक संस्थान के कोषाध्यक्ष दुर्गा खलखो ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

इस अवसर पर वार्ड पार्षद लक्ष्मी कच्छप, सुनीता खलखो, बाबूलाल बरहा, विजयलक्ष्मी लकड़ा, किरण नुनिया, जयकिशन यादव, दिलीप बरहा, भगवान दास तिर्की, भरत खलखो, महावीर बरहा, बाबूलाल कुजूर, राजकमल लकड़ा, गणेश कच्छप, विजय बाड़ा और शंकर तिर्की उपस्थित थे।

टूर्नामेंट के संचालन में लालू कुजूर, रोहित खलखो, कृष्णा मुंडा, पंकज खलखो, सुखदेव मिंज, महेश तिर्की, भोला तिर्की, शंभू टोप्पो, निशांत मिंज, संजय नीमा, बंटी मिंज, विक्रम खलखो, बलि तिग्गा, चंदन कच्छप, कर्मा कुजूर, बंधन कुजूर, बिष्णु मिंज, बिष्णु प्रसाद, सुभाष कच्छप, जगन्नाथ टोप्पो, बिट्टू कच्छप, बलराम साव, तेजनाथ लकड़ा, अमर लकड़ा, देशप्रेमी लकड़ा, सुधीर लकड़ा, दशरथ कुजूर, ललित कुजूर और संगम तिर्की की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

Share.
Exit mobile version