World News: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दिसंबर के पहले हफ्ते में भारत आ सकते हैं। 23वें वार्षिक शिखर सम्मेलन को लेकर तैयारियां तेज हैं और दोनों देशों के अधिकारी लगातार संपर्क में हैं। आधिकारिक तारीख अभी तय नहीं है, लेकिन 5–6 दिसंबर को यात्रा होने की सबसे ज्यादा संभावना जताई जा रही है।

रोजगार से लेकर रक्षा तक तीन बड़े करार की तैयारी

सूत्रों का कहना है कि इस दौरे में भारत और रूस तीन अहम समझौते करने जा रहे हैं। पहला समझौता उन 10 लाख भारतीय कुशल श्रमिकों से जुड़ा है, जिन्हें रूस अपने औद्योगिक क्षेत्रों में भर्ती करना चाहता है। इसके लिए लेबर मोबिलिटी एग्रीमेंट लगभग तैयार है, जिसमें वर्क परमिट से लेकर सुरक्षा और आव्रजन तक के मुद्दों को शामिल किया गया है।

दूसरा करार भारत की सुरक्षा क्षमता से जुड़ा है। भारत रूस से पांच और एस-400 राडार सिस्टम खरीदने में रुचि दिखा चुका है। पहले खरीदे गए पांच में से तीन सिस्टम भारत को मिल चुके हैं और दो की डिलीवरी बाकी है। यह वही सिस्टम है जिसने ऑपरेशन सिंदूर में दुश्मन की गतिविधियों को रोकने में बड़ी भूमिका निभाई थी।

सुखोई-57 के सह-उत्पादन पर बड़ा फैसला संभव

तीसरा बड़ा फैसला लड़ाकू विमानों को लेकर हो सकता है। भारत को पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान चाहिए और रूस का सुखोई-57 इस जरुरत को पूरा करता है। जानकारी है कि इसे भारत में सह-उत्पादन की शर्त पर खरीदने पर बातचीत आगे बढ़ चुकी है। वायुसेना को इस तरह के 114 विमानों की तत्काल जरूरत है। अगर पुतिन की यात्रा में समझौता हो गया, तो यह भारत के रक्षा ढांचे को नई मजबूती देगा।

भारत-अमेरिका-रूस समीकरण के बीच अहम दौरा

यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका ने रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर भारी टैरिफ लगा रखा है। तेल आयात में कटौती करके भारत दोनों देशों के साथ संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है। इसीलिए भारत चाहता है कि पुतिन की यह यात्रा न सिर्फ सकारात्मक हो बल्कि रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाए।

पुतिन आखिरी बार 2021 में भारत आए थे। यूक्रेन युद्ध के बाद यह उनकी पहली संभावित भारत यात्रा होगी। भारत और रूस ऊर्जा, रक्षा, आपदा प्रबंधन, शिक्षा और नई तकनीक में भी कई और समझौते कर सकते हैं।

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