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Pune: सांस्कृतिक राजधानी पुणे में रविवार को उस समय तनाव व्याप्त हो गया, जब मैसूर के शासक टीपू सुल्तान और छत्रपति शिवाजी महाराज की तुलना को लेकर भाजपा और कांग्रेस के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। विवाद की शुरुआत कांग्रेस नेता हर्षवर्धन सपकाल के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने टीपू सुल्तान के अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध को शिवाजी महाराज के आदर्शों के समान बताया था। भाजपा ने इस टिप्पणी को मराठा साम्राज्य के गौरव और हिंदू भावनाओं का अपमान करार दिया है।
पत्थरबाजी में पुलिसकर्मी और मीडियाकर्मी घायल
घटना उस समय हुई जब भाजपा कार्यकर्ता शिवाजीनगर स्थित कांग्रेस भवन के बाहर विरोध प्रदर्शन करने पहुंचे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, देखते ही देखते दोनों गुटों के बीच नारेबाजी शुरू हुई और स्थिति हिंसक झड़प में बदल गई। कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे पर जमकर पत्थर बरसाए। संयुक्त पुलिस आयुक्त रंजन कुमार शर्मा ने बताया कि इस हिंसा में दो पुलिसकर्मियों और दो मीडियाकर्मियों सहित कुल 9 लोग घायल हुए हैं। स्थिति पर काबू पाने के लिए भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
FIR दर्ज, राजनीति गरमाई
भाजपा की शिकायत पर हर्षवर्धन सपकाल के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। वहीं, कांग्रेस की पुणे इकाई के अध्यक्ष अरविंद शिंदे ने भी भाजपा पदाधिकारियों पर हमले का आरोप लगाते हुए जवाबी शिकायत दी है। पुलिस अब दोनों पक्षों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रही है।
भाजपा के पुराने स्टैंड पर कांग्रेस का पलटवार
इस विवाद के बीच कांग्रेस नेता सचिन सावंत ने भाजपा पर ध्रुवीकरण की राजनीति का आरोप लगाया है। सावंत ने दावा किया कि भाजपा पहले खुद टीपू सुल्तान की प्रशंसा करती रही है और 2012 में अकोला में एक हॉल का नाम उनके नाम पर रखने का प्रस्ताव भी दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव नजदीक आते ही भाजपा इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रही है। फिलहाल पुणे में स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन इस मुद्दे ने पूरे राज्य की सियासत में उबाल ला दिया है।

