Kolkata: पश्चिम बंगाल की धरती पर शनिवार को एक ऐसा दृश्य दिखा जिसने भारतीय राजनीति के इतिहास में एक अमिट छाप छोड़ दी। राज्य में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बंगाल की जनता के प्रति अपना अटूट सम्मान प्रकट करते हुए मंच पर लेटकर साष्टांग प्रणाम किया। इस प्रतीक ने स्पष्ट कर दिया कि लोकतंत्र में जनता ही ‘जनार्दन’ है।
सोशल मीडिया पर भावुक संदेश
प्रधानमंत्री ने इस ऐतिहासिक क्षण का एक वीडियो अपने इंस्टाग्राम पर भी साझा किया। उन्होंने इसके कैप्शन में लिखा, “मैं पश्चिम बंगाल की जनशक्ति को नमन करता हूं।” यह संदेश न केवल एक पोस्ट था, बल्कि उस जनादेश की विनम्र स्वीकृति थी जिसने बंगाल की सत्ता का समीकरण पूरी तरह बदल दिया है।
टैगोर जयंती और सांस्कृतिक संयोग
सत्ता के इस बड़े परिवर्तन का समय भी बेहद खास रहा। यह समारोह गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती के पावन अवसर पर आयोजित हुआ। बंगाल की सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक गुरुदेव के जन्मदिवस पर नई सरकार का शपथ ग्रहण करना ‘सोनार बांग्ला’ के संकल्प को एक मजबूत सांस्कृतिक आधार प्रदान करता है।
दूरदर्शी रहा पीएम मोदी का आकलन
राजनीतिक विश्लेषक इस जीत को प्रधानमंत्री के उस पुराने बयान से जोड़कर देख रहे हैं, जो उन्होंने बिहार चुनाव के नतीजों के समय दिया था। उस वक्त पीएम मोदी ने कहा था कि “बिहार के नतीजों ने बंगाल का रास्ता खोल दिया है।” आज वह रणनीतिक आकलन धरातल पर सच साबित हुआ है और बंगाल के राजनीतिक दुर्ग में पहली बार भाजपा की सरकार का प्रवेश हुआ है।
संसद से सड़क तक लोकतंत्र का सम्मान
यह पहली बार नहीं है जब पीएम मोदी ने इस तरह का सम्मान दिखाया हो। संसद की सीढ़ियों से लेकर विभिन्न राज्यों के शपथ ग्रहण मंचों तक, उन्होंने हमेशा लोकतंत्र के मंदिर और जनता की शक्ति का इसी तरह स्वागत किया है। बंगाल की जीत के बाद उनका यह साष्टांग प्रणाम राज्य की जनता के आशीर्वाद के प्रति उनकी गहरी कृतज्ञता को दर्शाता है।
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