India News: पीएम नरेंद्र मोदी ने शनिवार को गुजरात के भावनगर में ‘समुद्र से समृद्धि’ कार्यक्रम के दौरान देश के नौवहन और शिप बिल्डिंग सेक्टर को लेकर बड़ा ऐलान किया। पीएम मोदी ने कहा कि भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अब “चिप हो या शिप, हमें भारत में ही बनाना होगा।”
मोदी ने कहा कि जहाज निर्माण क्षेत्र को अब बुनियादी ढांचे का दर्जा दे दिया गया है। इसका मतलब है कि शिप बिल्डिंग कंपनियों को बैंकों से आसानी से कर्ज मिलेगा और उन्हें कम ब्याज दरों का लाभ भी होगा। इससे देश में बड़े जहाज बनाना आसान होगा और भारत का समुद्री क्षेत्र मजबूत होगा।
पीएम ने इस मौके पर 70 हजार करोड़ रुपये की तीन नई योजनाओं का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि शिपबिल्डिंग और समुद्री जहाजों की ओनरशिप के मामले में भारत अभी 16वें स्थान पर है। देश के पास जितनी भी शिप हैं, उनमें से सिर्फ 7 फीसदी ही भारत में बनी हैं। 50 साल पहले भारत का 40 प्रतिशत व्यापार भारतीय जहाजों से होता था, लेकिन अब यह घटकर सिर्फ 5 फीसदी रह गया है।
मोदी ने आंकड़े रखते हुए कहा कि भारत हर साल विदेशी कंपनियों को करीब 6 लाख करोड़ रुपये माल ढुलाई पर खर्च करता है। अगर पिछली सरकारों ने यही पैसा भारतीय नौवहन उद्योग में लगाया होता, तो आज दुनिया भारतीय जहाजों पर निर्भर होती और देश करोड़ों-करोड़ कमा रहा होता।
पीएम ने आगे कहा कि भारत का समुद्री क्षेत्र अब अगली पीढ़ी के सुधारों की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने एलान किया कि अब देश के सभी प्रमुख बंदरगाहों को अलग-अलग दस्तावेजों और जटिल प्रक्रियाओं से मुक्ति मिल जाएगी। ‘एक राष्ट्र, एक दस्तावेज़ और एक राष्ट्र, एक बंदरगाह प्रक्रिया’ लागू होने से व्यापार करना और आसान हो जाएगा।
मोदी ने बताया कि समुद्री क्षेत्र में कई सुधार किए गए हैं और पांच पुराने समुद्री कानूनों को नए रूप में पेश किया गया है। इससे नौवहन और बंदरगाह प्रशासन में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे।
कार्यक्रम के दौरान पीएम ने कुल 34,200 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया। उन्होंने साफ कहा कि आत्मनिर्भर भारत के लिए यह जरूरी है कि चाहे चिप हो या शिप, हर चीज अब भारत में ही बने।



