World News: पीएम नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को ओमान की राजधानी मस्कट में भारत और ओमान के बीच आर्थिक संबंधों की एक नई इबारत लिख दी है। भारत-ओमान बिजनेस समिट को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने ‘कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट’ (सीईपीए) को दोनों देशों के साझा भविष्य का ब्लूप्रिंट बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह समझौता केवल व्यापारिक दस्तावेज नहीं है, बल्कि 21वीं सदी में दोनों देशों के अटूट भरोसे का प्रतीक है।

समुद्र की लहरें बदल सकती हैं, पर हमारी दोस्ती नहीं

पीएम मोदी ने भारत और ओमान के सदियों पुराने समुद्री व्यापारिक संबंधों का जिक्र करते हुए भावुक संदेश दिया। उन्होंने कहा, “मांडवी और मस्कट के बीच अरब सागर हमेशा से एक मजबूत पुल रहा है। मौसम बदल सकते हैं, लहरें अपना रुख मोड़ सकती हैं, लेकिन भारत-ओमान की दोस्ती हर लहर के साथ नई ऊंचाइयों को छुएगी।” उन्होंने बिजनेस लीडर्स को याद दिलाया कि वे उस शानदार विरासत के उत्तराधिकारी हैं, जिसकी जड़ें सभ्यताओं की शुरुआत से जुड़ी हैं।

तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का लाभ ओमान को

पीएम ने वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती ताकत का जिक्र करते हुए कहा कि भारत आज दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की प्रगति कभी अकेले की नहीं होती; वह अपने साथ अपने मित्रों को भी आगे बढ़ाता है। ओमान के लिए यह और भी खास है क्योंकि दोनों देश न केवल करीबी दोस्त हैं, बल्कि समुद्री पड़ोसी भी हैं।

व्यापार और निवेश के लिए नए अवसरों का द्वार

पीएम मोदी ने दोनों देशों के बिजनेस लीडर्स से इस ऐतिहासिक अवसर का लाभ उठाने की अपील की। सीईपीए समझौते से आने वाले दशक में द्विपक्षीय व्यापार को नई ऊर्जा मिलेगी और निवेश के क्षेत्र में सुरक्षा का भाव बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि पीढ़ियों से चला आ रहा भरोसा अब आधुनिक तकनीक और नए क्षेत्रों में सहयोग के रूप में दिखाई देगा। इस समिट ने स्पष्ट कर दिया है कि खाड़ी देशों में ओमान भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक रूप से कितना महत्वपूर्ण है।

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