New Delhi: देश की रक्षा तैयारियों को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी 14 फरवरी को असम के डिब्रूगढ़ जिले के मोरान क्षेत्र में नेशनल हाईवे-2 पर बनी इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड का उद्घाटन करेंगे। यह उत्तर-पूर्व भारत में राष्ट्रीय राजमार्ग पर विकसित की गई पहली इमरजेंसी लैंडिंग सुविधा है।
इस परियोजना को भविष्य की आपात स्थितियों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। रक्षा अधिकारियों के अनुसार, मोरान से गुजरने वाले नेशनल हाईवे-2 के 4.2 किलोमीटर हिस्से को विशेष रूप से इस तरह विकसित किया गया है कि आवश्यकता पड़ने पर भारतीय वायुसेना के विमान यहां सुरक्षित रूप से उतर और उड़ान भर सकें।
उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान भारतीय वायुसेना द्वारा इस एयर स्ट्रिप पर अभ्यास भी किया जाएगा। जानकारी के अनुसार, इस दौरान राफेल और सुखोई-30 एमकेआई जैसे फाइटर जेट ‘टच एंड गो’ अभ्यास करेंगे। इसके अलावा सी-130जे सुपर हरक्यूलिस और एएन-32 जैसे परिवहन विमान इस पट्टी पर लैंडिंग और टेक-ऑफ ड्रिल का प्रदर्शन करेंगे। यह अभ्यास स्ट्रिप की तकनीकी क्षमता और उपयोगिता को दर्शाने के लिए किया जाएगा।
गौरतलब है कि इससे पहले 16 नवंबर 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के पास पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर बनी इमरजेंसी एयर स्ट्रिप का उद्घाटन किया था। उस दौरान प्रधानमंत्री स्वयं सी-130जे सुपर हरक्यूलिस विमान से इस स्ट्रिप पर उतरे थे।
भारतीय वायुसेना अपनी परिचालन क्षमता को बढ़ाने के लिए लगातार नए संसाधन और बुनियादी ढांचे विकसित कर रही है। वहीं, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय देशभर के राष्ट्रीय राजमार्गों पर इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड विकसित करने पर विशेष ध्यान दे रहा है।
संसद में दिए गए एक जवाब में मंत्रालय ने बताया था कि भारतीय वायुसेना द्वारा देशभर में कुल 28 इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड को चिन्हित किया गया है। इनमें असम में 5, पश्चिम बंगाल में 4, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और गुजरात में 3-3, तमिलनाडु, बिहार, जम्मू-कश्मीर और हरियाणा में 2-2, जबकि पंजाब और उत्तर प्रदेश में 1-1 स्ट्रिप शामिल है।
इन इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड का उद्देश्य युद्ध या आपदा की स्थिति में वैकल्पिक रनवे उपलब्ध कराना है। यदि किसी कारणवश मुख्य एयरबेस का उपयोग संभव न हो, तो ऐसे हाईवे रनवे विमानों के लिए सुरक्षित विकल्प बन सकते हैं। इसके साथ ही प्राकृतिक आपदाओं के समय राहत और बचाव कार्यों में भी इनका उपयोग किया जा सकता है।
डिब्रूगढ़ में बनी यह इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड न केवल उत्तर-पूर्व भारत की सामरिक तैयारी को मजबूती देगी, बल्कि देश की आपात प्रतिक्रिया क्षमता को भी और प्रभावी बनाएगी। 14 फरवरी को होने वाला यह उद्घाटन इस दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।



