Bihar News: दरभंगा जिले के तारडीह प्रखंड अंतर्गत ककोड़ा पूर्वी पंचायत इन दिनों सरकारी योजनाओं में हो रही बंदरबांट का केंद्र बन गई है। ककोड़ा गांव में जिला पार्षद की देखरेख और ठेकेदारी में चल रहे पोखर निर्माण कार्य ने विकास के दावों की पोल खोलकर रख दी है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि जल संरक्षण के नाम पर केवल सरकारी खजाने को चूना लगाया जा रहा है। निर्माण कार्य में पारदर्शिता का अभाव ऐसा है कि न तो वहां कोई सूचना पट्ट लगा है और न ही काम के मानकों का पालन किया जा रहा है।

तीसरे दर्जे की ईंटें और रेत का खेल; गायब है योजना का सूचना बोर्ड

सरकारी नियमों के अनुसार, किसी भी छोटी या बड़ी योजना के शुरू होने से पहले वहां सूचना बोर्ड लगाना अनिवार्य है, जिसमें स्वीकृत राशि, कार्य अवधि और एजेंसी का विवरण हो। लेकिन ककोड़ा में ऐसा कुछ नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण में उपयोग की जा रही ईंटें अत्यंत घटिया किस्म की हैं, जो हाथ लगाते ही टूट रही हैं। सीमेंट और बालू का अनुपात भी मानकों के विपरीत है। ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना बोर्ड न लगाना एक सोची-समझी साजिश है ताकि लोग योजना की असली लागत और गुणवत्ता के बारे में सवाल न उठा सकें।

निगरानी व्यवस्था मौन या ‘कमीशन’ का है खेल? प्रशासन से जांच की मांग

पोखर जैसे जलस्रोत गांव की लाइफलाइन होते हैं, लेकिन यहां भ्रष्टाचार की वजह से भविष्य में इनके क्षतिग्रस्त होने का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों का तर्क है कि बिना विभागीय अभियंताओं और प्रखंड अधिकारियों की मिलीभगत के इतनी बड़ी लापरवाही मुमकिन नहीं है। क्या तकनीकी निरीक्षण करने वाले अधिकारी जानबूझकर आंखें मूंदे हुए हैं? ग्रामीणों ने अब जिला प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष तकनीकी जांच और दोषियों को ब्लैकलिस्ट करने की मांग की है। अब देखना यह है कि क्या दरभंगा जिला प्रशासन इस मामले में संज्ञान लेकर भ्रष्ट सिंडिकेट पर कार्रवाई करता है या फिर यह फाइल भी फाइलों में दफन हो जाएगी।

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