Health Desk: आयुर्वेदाचार्यों के मुताबिक, पित्त दोष हमारे शरीर और मन, दोनों के संवेगों को नियंत्रित करने में मुख्य भूमिका निभाता है। जब शरीर में पित्त असंतुलित हो जाता है, तो व्यक्ति को मानसिक बेचैनी, अत्यधिक क्रोध, चिंता और भावनात्मक अस्थिरता का सामना करना पड़ता है। शारीरिक रूप से इसके लक्षणों में पेट में जलन, हार्टबर्न, थकान और बिना किसी स्पष्ट कारण के उदासी महसूस होना शामिल है।

शाम के समय बढ़ती है परेशानी

विशेषज्ञों का कहना है कि शाम के वक्त यह बेचैनी और अधिक बढ़ जाती है। आयुर्वेद के अनुसार, पित्त को दबाने के बजाय उसे शांत करना जरूरी है। इसके लिए सही दिनचर्या और ठंडे व हल्के आहार का पालन करना चाहिए। पित्त को संतुलित करने के लिए जीरा, सौंफ, सोंठ और अंगूर के रस से तैयार पेय पदार्थ बेहद असरदार होते हैं, जो पेट की जलन और हार्टबर्न में तुरंत राहत देते हैं।

अविपत्तिकर चूर्ण और घी नस्य का कमाल

पित्त शामक औषधियों में ‘अविपत्तिकर चूर्ण’ को सबसे लाभकारी माना गया है। यह न केवल पाचन सुधारता है बल्कि तनाव को भी नियंत्रित करता है। इसे गुनगुने पानी के साथ लिया जा सकता है। इसके साथ ही ‘घी नस्य’ की प्राचीन पद्धति भी प्रभावी है। रात में सोने से पहले नाक में देसी घी की कुछ बूंदें डालने से मस्तिष्क को शांति मिलती है और मानसिक अस्थिरता कम होती है।

मालिश और हर्बल चाय से मिलेगी राहत

शरीर की गर्मी कम करने के लिए नारियल या भृंगराज तेल से सिर और तलवों की मालिश (अभ्यंग) करना बहुत फायदेमंद है। यह जलन और खुजली में राहत प्रदान करता है। इसके अलावा, कैमोमाइल, तुलसी और गुलाब की पंखुड़ियों से बनी हर्बल चाय का सेवन मानसिक तनाव को कम कर मन को गहरी शांति देता है। किसी भी औषधि के सेवन से पहले चिकित्सकीय परामर्श अवश्य लें।

इस खबर को भी पढ़ें : सुबह उठते ही मुंह का कड़वापन? इसे न करें इग्नोर, पेट दे रहा है गंभीर संकेत

Share.
Exit mobile version